लग्जरी कार, आईफोन और चांदी की ईंट...एस्ट्रोलॉजर की रईसी लाइफ देख पुलिस के उड़े होश, करोड़ो रुपये ठगने वाले गिरोह का भांडाफोड़

मध्य प्रदेश के अशोकनगर में एक एस्ट्रोलॉजर आयुषी चौहान ने प्रेम जाल और ब्लैकमेलिंग के जरिए एक युवती से 1.30 करोड़ रुपये ठगे. ठगी की कमाई से उसने आधा किलो चांदी की चप्पलें, चांदी का पर्स व ईंट बनवाई और लग्जरी सामान खरीदा, जिसे देख पुलिस भी हैरान रह गई.

Sonee Srivastav

भोपाल: मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में प्रेम जाल और ब्लैकमेलिंग के जरिए एक युवती से करीब 1.30 करोड़ रुपये ठगने वाले गिरोह की लग्जरी लाइफ का खुलासा पुलिस जांच में हुआ है. ठगी की कमाई से आरोपी ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे. पुलिस को जब उनके घर से जब्त की गई महंगी चीजें दिखी तो हैरानी का ठिकाना न रहा.

आधा किलो चांदी की चप्पलें और चांदी की ईंट

गुना की रहने वाली आयुषी चौहान, जो खुद को एस्ट्रोलॉजर और तांत्रिक बताती थी, इस गिरोह की मुख्य आरोपी है. पुलिस पूछताछ में पता चला कि आयुषी ने ठगी के पैसे से खासतौर पर आधा किलो चांदी की चप्पलें बनवाई. उसका पर्स भी चांदी का था और उसमें रखने के लिए चांदी की ईंट भी तैयार कराई गई. आयुषी और उसके पति आकाश चौहान ने कुल 50 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर खरीदे. 

पुलिस ने उनके घर से लग्जरी कार, दो आईफोन, एप्पल नोटबुक, महंगी स्कूटी, ब्रांडेड कॉस्मेटिक्स, बड़ा फ्रीज, वाशिंग मशीन, अलमारी और महंगी घड़ियां भी जब्त की हैं. कुल 70 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति और सामान पुलिस के कब्जे में है.

कैसे बुना गया ठगी का जाल

21 वर्षीय पीड़िता जब 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, तब इंस्टाग्राम पर आदित्य सिंह तोमर से उसकी दोस्ती हुई. आदित्य ने प्रेम जाल में फंसाया और आर्यन सोनी के टैटू स्टूडियो में ले जाकर उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया. पीड़िता के पिता की मौत के बाद दोनों ने वीडियो का बहाना बनाकर पहले दो लाख रुपये वसूले. 

बाद में आयुषी चौहान और उसके पति आकाश को शामिल कर बड़े स्तर पर ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी. कभी क्राइम ब्रांच, कभी सीआईडी बताकर फोन करते और लाखों रुपये मांगते. अंत में 60 लाख की मांग की और पीड़िता का सोना गिरवी रखकर 35 लाख रुपये हड़प लिए.

पाप छिपाने के लिए दान-पुण्य

ठगी की रकम पर पाप न लगे, इसलिए आरोपी मंदिरों में दान करते थे. गरीबों के लिए भंडारा कराते और बंगाल में बलि भी दी. फिर भी वे लग्जरी जीवन जीते रहे। पर्यटन स्थलों पर घूमने जाते और महंगे सामान खरीदते.

कोतवाली प्रभारी रविप्रताप सिंह चौहान के अनुसार, आरोपी मोबाइल और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है. डिलीट डेटा रिकवर होने पर और राज खुल सकते हैं. बैंक खातों और पेमेंट गेटवे की भी जांच हो रही है. पुलिस को शक है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई अन्य युवतियां भी इसके शिकार हो सकती हैं. 

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