नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान ने हफ्तों से जारी गंभीर क्षेत्रीय तनाव के बाद एक बड़े शांति समझौते पर सहमति जताई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बात की घोषणा की है कि दोनों देशों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने का संकल्प लिया है. इस कूटनीतिक सफलता की पुष्टि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने आधिकारिक बयानों के जरिए की. दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण समझौता आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया जाएगा.
शहबाज शरीफ ने दी कूटनीतिक कामयाबी की जानकारी
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस समझौते को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि गहन क्षेत्रीय मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार हुए हैं. शरीफ ने इस शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए कतर की अग्रणी भूमिका की सराहना की. इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब और तुर्की द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदानों को भी रेखांकित किया, जिन्होंने दोनों पक्षों के मतभेदों को पाटने में मुख्य भूमिका निभाई है. औपचारिक हस्ताक्षर से पहले कार्यान्वयन को लेकर संबंधित देशों के बीच बैठकों का दौर भी शुरू होने जा रहा है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की सौदे की पुष्टि
प्रधानमंत्री शरीफ के बयान के ठीक बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस खबर की तस्दीक की. ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह संपन्न हो चुका है. सभी को बधाई!
परमाणु समझौते की शर्तों का पालन
अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए यह भी साफ किया कि यदि ईरान अंतिम परमाणु समझौते की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ दोबारा सैन्य हमले शुरू करने पर विचार कर सकता है. ट्रंप ने एक अन्य विकल्प का भी जिक्र किया जिसके तहत अमेरिका मध्य पूर्व के 'रक्षक' के रूप में कार्य करेगा, जिसके बदले में क्षेत्र के राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को मिलेगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्रीय राजनीति पर असर
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की गारंटी दी है कि इस समझौते के लागू होने के बाद 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों की आवाजाही हमेशा के लिए पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहेगी. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आपत्तियों के बावजूद इस समझौते का बचाव करते हुए ट्रंप ने तर्क दिया कि उनके इस रणनीतिक कदम ने एक ऐसे बड़े संकट को टाल दिया है. जो भविष्य में इजरायल के विनाश का कारण बन सकता था। अब 19 जून को होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. First Updated : Monday, 15 June 2026