पाकिस्तान सरकार द्वारा 'जश्न-ए-पाकिस्तान' रैली आयोजित करने के बाद बलूचिस्तान में स्थिति तनावपूर्ण हो गई. जहां एक ओर पाकिस्तान सरकार अपनी जनता को खुश करने के लिए रैलियों का आयोजन कर रही थी, वहीं बलूचिस्तान में ये रैली हिंसा का शिकार हो गई. बुधवार को क्वेटा में आयोजित इस रैली पर एक शक्तिशाली विस्फोट और गोलीबारी का हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम 10 लोग घायल हो गए. ये हमला पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बलूच आर्मी के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है, जो अब इस तरह के प्रतिरोधी कदम उठा रही है.
पुलिस के अनुसार, ये रैली सरियाब कस्टम्स से शहर की ओर जा रही थी, जब मुनीर मेंगल रोड के पास हथियारबंद हमलावरों ने ग्रेनेड फेंका और रैली में शामिल लोगों पर गोलीबारी की. इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी की और घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा. घायलों को क्वेटा के सिविल अस्पताल और बोलन मेडिकल कॉम्प्लेक्स में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है. हमले में शामिल पीड़ित अधिकांश 20 से 50 साल के पुरुष थे.
रैली का नेतृत्व पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के एमपीए अली मदद जातक ने किया और इसमें बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती भी शामिल हुए. हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते मुख्यमंत्री ने अपना भाषण देने के बाद रैली स्थल से तुरंत प्रस्थान किया.
हमले के बाद बलूच आर्मी (BLA) की प्रतिक्रिया साफ तौर पर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ उनके विरोध को दर्शाती है. ये हमला इस बात का संकेत है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार की पकड़ कमजोर हो रही है और वहां के लोग अब और अधिक प्रतिरोधी कदम उठा रहे हैं. बीएलए ने पिछले कुछ समय में अपनी गतिविधियों में इजाफा किया है और अब उनकी पकड़ इस इलाके में और मजबूत हो गई है.
हमले के बाद पुलिस और आतंकवाद निरोधी विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान जल्दी ही की जाएगी. इस हमले ने पाकिस्तान और भारत के बीच जारी तनाव को भी एक नई दिशा दी है, क्योंकि बलूच आर्मी द्वारा किए गए हमलों ने पाकिस्तान के आंतरिक संकट को और बढ़ा दिया है. First Updated : Thursday, 15 May 2025