PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रावलकोट में शहबाज सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, भारत से मदद की उठी मांग

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ लगातार असंतोष  बढ़ता दिखाई दे रहा है.बताया जा रहा है कि यह आंदोलन केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर तक सीमित नहीं है. विदेशों में रहने वाले समर्थकों ने भी कई देशों में पाकिस्तानी दूतावासों और राजनयिक मिशनों के बाहर प्रदर्शन कर अपना समर्थन व्यक्त किया है.

calender

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ लगातार असंतोष  बढ़ता दिखाई दे रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलकोट क्षेत्र में हजारों लोग पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बता दें, इस दौरान प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्थानीय लोगों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है और प्रशासनिक फैसले उनकी सहमति के बिना लिए जा रहे हैं. क्या है पूरा मामला चलिए जानते है. 

पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन

रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान कई वक्ताओं ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ तीखी नाराजगी जाहिर की. इस दौरान मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति पर नए सिरे से विचार होना चाहिए. इतना ही नहीं कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं बदले तो वे भारत के साथ जुड़ने की मांग उठा सकते हैं.

आंदोलन का दायरा बढ़ा

बताया जा रहा है कि यह आंदोलन केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर तक सीमित नहीं है. विदेशों में रहने वाले समर्थकों ने भी कई देशों में पाकिस्तानी दूतावासों और राजनयिक मिशनों के बाहर प्रदर्शन कर अपना समर्थन व्यक्त किया है.

सरदार अमन खान का नेतृत्व

इस आंदोलन का नेतृत्व स्थानीय नेताओं द्वारा किया जा रहा है, जिनमें नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सरदार अमन खान प्रमुख रूप से शामिल हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति दो सप्ताह तक रोकने के बाद आंदोलन और अधिक तेज हो गया.

सरदार अमन खान का बयान

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है. उनका दावा था कि इस क्षेत्र से अधिक जरूरत पाकिस्तान को है, जबकि यहां के लोगों को पाकिस्तान की उतनी आवश्यकता नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर आवश्यक वस्तुओं पर लगी पाबंदियां जारी रहती हैं, तो स्थानीय लोग मदद के लिए भारत की ओर रुख कर सकते हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ लोगों को यह कहते हुए भी सुना गया कि वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को अपना सेना प्रमुख नहीं मानते और किसी भी प्रकार के तानाशाही शासन को स्वीकार नहीं करेंगे. हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

एलओसी के पास धरना

रिपोर्टों के अनुसार, 9 जून से नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट भी अलग से धरना जारी है. सरदार अमन खान ने अपने संबोधन में कहा कि यदि भारत से किसी प्रकार की सहायता मिलती है, तो इससे क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति बदल सकती है और इस्लामाबाद पर दबाव बढ़ेगा. फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है. First Updated : Tuesday, 30 June 2026