पश्चिमी एशिया में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में अस्थिरता और चिंता का माहौल और गहरा गया है. इसी बीच रूस ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. रूस का कहना है कि जिस अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों की बात की जाती है, उनका वास्तविक महत्व अब लगभग खत्म होता जा रहा है.
मौजूदा हालात को देखते हुए रूस ने एक बार फिर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस पुराने प्रस्ताव को दोहराया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों (P-5) की बैठक बुलाने की बात कही गई थी. रूस के सरकारी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अंतरराष्ट्रीय कानून की स्थिति पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि आज की दुनिया में वह व्यवस्था लगभग खो चुकी है जिसे कभी अंतरराष्ट्रीय कानून कहा जाता था. पेसकोव ने कहा कि जब किसी व्यवस्था का वास्तविक अस्तित्व ही नहीं रह जाता, तो देशों से उसके नियमों और सिद्धांतों का पालन करने की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है.
उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए ‘De Jure’ और ‘De Facto’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया. उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानून कागज़ों या सिद्धांतों के स्तर पर यानी ‘De Jure’ मौजूद दिखाई दे सकता है, लेकिन वास्तविक स्थिति यानी ‘De Facto’ में इसकी प्रभावशीलता लगभग समाप्त हो चुकी है. उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में कोई भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बता सकता कि अंतरराष्ट्रीय कानून की वास्तविक परिभाषा क्या रह गई है.
पेसकोव ने यह भी याद दिलाया कि कोरोना महामारी से पहले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सुझाव दिया था कि दुनिया की पांच प्रमुख शक्तियां- रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन एक मंच पर बैठकर वैश्विक सुरक्षा, स्थिरता और मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा करें. उनका मानना है कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय तनाव और संघर्षों को देखते हुए इस प्रस्ताव पर दोबारा गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.
रूस ने चेतावनी दी है कि ईरान पर हुए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं. क्षेत्रीय संघर्षों, राजनीतिक मतभेदों और अनसुलझे विवादों का संयुक्त प्रभाव केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है.
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका से स्पष्ट जवाब मांगा है. उनका कहना है कि अमेरिका को अपनी रणनीतियों और योजनाओं के बारे में दुनिया को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. साथ ही यह भी बताना चाहिए कि उसकी नीतियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और स्थापित मानकों के अनुरूप किस तरह हैं. लावरोव ने कहा कि अब समय आ गया है जब दुनिया को यह समझना होगा कि वह किस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में आगे बढ़ रही है. First Updated : Sunday, 08 March 2026