तेल बेचने वाला सऊदी अब खुद खरीद रहा ईंधन, होर्मुज संकट ने बढ़ाई टेंशन

प्राकृतिक गैस उत्पादन में गिरावट और होर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण सऊदी अरब को बिजली उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर फ्यूल ऑयल आयात करना पड़ रहा है. गर्मी में बढ़ती बिजली मांग के बीच देश अब वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था मजबूत करने और जाफुराह गैस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब इन दिनों एक अलग तरह की चुनौती का सामना कर रहा है. जो देश लंबे समय से दुनियाभर को कच्चा तेल सप्लाई करता आया है, अब उसे खुद बिजली उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर फ्यूल ऑयल आयात करना पड़ रहा है. 

विशेषज्ञों का क्या मानना है?  

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट के बीच यह स्थिति और गंभीर होती दिखाई दे रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक गैस उत्पादन में कमी आने से सऊदी अरब को वैकल्पिक ईंधन पर निर्भर होना पड़ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के महीनों में सऊदी अरब में गैस उत्पादन धीमा हुआ है. इसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है, क्योंकि देश लंबे समय से प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रहा था. गैस की उपलब्धता कम होने के कारण अब बिजली बनाने के लिए फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने सऊदी अरब ने प्रतिदिन औसतन करीब 3 लाख 60 हजार बैरल फ्यूल ऑयल आयात किया. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग 86 प्रतिशत ज्यादा बताया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में यह आयात और बढ़ सकता है, क्योंकि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है.

खाड़ी देशों में तापमान बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर का उपयोग भी तेजी से बढ़ता है. इसी वजह से बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच जाती है. ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल सऊदी अरब में बिजली उत्पादन के लिए फ्यूल ऑयल और कच्चे तेल की खपत 10 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो सकती है.

तेल उत्पादन पर असर

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर तेल उत्पादन पर भी पड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब को तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है, जिससे प्रतिदिन लाखों बैरल उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसके साथ ही कच्चे तेल से निकलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई भी कम हो गई है.

हालांकि सऊदी अरब लंबे समय से अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव की दिशा में काम कर रहा है. देश बिजली उत्पादन में फ्यूल ऑयल की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ाना चाहता है. इसी योजना के तहत जाफुराह गैस फील्ड प्रोजेक्ट पर भारी निवेश किया जा रहा है. इसे दुनिया के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है, लेकिन इसके पूरी क्षमता से शुरू होने में अभी कई साल लग सकते हैं.

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