पाकिस्तान क्यों चाहता है ईरान-अमेरिका के बीच जल्द समझौता?

पाकिस्तान ईरान-अमेरिका तनाव खत्म कराने की कोशिश में जुटा है, क्योंकि उसकी खराब आर्थिक स्थिति और भारी विदेशी कर्ज उसे क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए मजबूर कर रहे हैं. वहीं, अमेरिका समझौते के पक्ष में दिख रहा है, जबकि इजरायल ईरान पर सख्त कार्रवाई चाहता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: पाकिस्तान इन दिनों लगातार क्षेत्र में शांति की बात कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे उसकी अपनी आर्थिक मजबूरियां भी बड़ी वजह हैं. इजरायल के मीडिया संस्थान सी14 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्लामाबाद चाहता है कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव जल्द खत्म हो, ताकि क्षेत्र में स्थिरता लौट सके और पाकिस्तान पर बढ़ता आर्थिक दबाव कुछ कम हो. 

पाकिस्तान पर कितना कर्ज? 

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान इस समय 100 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और उसकी आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और ईरान के बीच हाल के दिनों में कई स्तरों पर बातचीत हुई है. दोनों देशों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनने की चर्चा है कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश करेगा. इसके बदले में ईरान पाकिस्तान को आर्थिक सहायता या निवेश के रूप में सहयोग दे सकता है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति को कुछ राहत मिल सके.

इसी कड़ी में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे हैं. एक सप्ताह के भीतर उनकी यह दूसरी ईरान यात्रा बताई जा रही है. पाकिस्तानी मीडिया ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक नकवी वहां ईरानी अधिकारियों के साथ अमेरिका-ईरान संबंधों और संभावित शांति वार्ता पर चर्चा कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस्लामाबाद लगातार दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल कराने के प्रयासों में जुटा हुआ है.

अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीति को लेकर मतभेद

दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीति को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल ही में हुई फोन वार्ता काफी तनावपूर्ण रही. बताया जा रहा है कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय समझौते और कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है, जबकि नेतन्याहू ईरान पर और सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कतर, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान समेत कुछ देशों ने मिलकर एक संशोधित शांति प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करना है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक पहल कितनी सफल हो पाती है.

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