फर्जी कंपनियों से 645 करोड़ की ठगी! PMLA कोर्ट में पेश हुआ मास्टरमाइंड रिभव

पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि की 10 दिनों की शुरुआती हिरासत खत्म होने के बाद गुरुवार को उसे पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया. ईडी ने अदालत के सामने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

हरियाणा: हरियाणा और चंडीगढ़ में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले 645 करोड़ रुपये के बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय को बड़ा झटका लगा है. मामले के मुख्य साजिशकर्ता और आईडीएफसी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि की 10 दिनों की शुरुआती हिरासत खत्म होने के बाद गुरुवार को उसे पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया.

4 दिनों की रिमांड की गुहार

जांच एजेंसी ने पूछताछ का दायरा बढ़ाने और पैसों के वित्तीय लेन-देन की गुत्थी सुलझाने के लिए कोर्ट से 4 दिनों की अतिरिक्त रिमांड की गुहार लगाई थी. हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने ईडी को केवल 1 दिन की ही हिरासत मंजूर की.

सरकारी खातों से करोड़ों की हेराफेरी

प्रवर्तन निदेशालय की तफ्तीश में सामने आया है कि मुख्य आरोपी रिभव ऋषि चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा में मैनेजर के पद पर तैनात था. इस पद का दुरुपयोग करते हुए उसने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों के आधिकारिक खातों से करोड़ों रुपये की जनता की गाढ़ी कमाई का गबन किया.

गलत पहचान पत्रों का इस्तेमाल

रिभव ऋषि ने बड़ी चालाकी से अपने निजी सहायकों, ड्राइवरों, घरेलू कर्मचारियों और रिश्तेदारों के पहचान पत्रों का गलत इस्तेमाल किया. इसके बाद, सरकारी फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए आए पैसों को बैंक में जमा करने के बजाय सीधे इन फर्जी फर्मों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया.

सोने की फर्जी खरीद और मनी ट्रेल का खेल

ईडी ने अदालत के समक्ष बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं. सरकारी खातों से उड़ाए गए इस पैसे को बाद में विभिन्न ज्वेलर्स और रियल एस्टेट ऑपरेटरों के खातों में भेजा गया. सुनारों के साथ मिलकर फर्जी बिल तैयार किए गए ताकि यह दिखाया जा सके कि इस रकम से सोना खरीदा गया है.

कई अहम सुराग हाथ लगे

इसके बदले में करोड़ों रुपये की नकद राशि वापस ली गई जिसे चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में फैले नेटवर्क के जरिए अलग-अलग सफेदपोश लोगों तक पहुंचाया गया. जांच में पाया गया है कि इस काली कमाई में से करीब 34.22 करोड़ रुपये सीधे तौर पर रिभव ऋषि और उसके परिवार के सदस्यों ने हासिल किए हैं. अदालत को जांच अधिकारियों ने बताया कि 10 दिनों की पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो