पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए हिसार की यूनिवर्सिटी की अनोखी पहल, जारी किए 5 बड़े आदेश

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए नए नियम लागू किए हैं. कर्मचारियों को शुक्रवार को साइकिल या पैदल आने, ऑनलाइन मीटिंग करने और सरकारी वाहनों का सीमित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं.

Shraddha Mishra

हिसार: देश में बढ़ते ईंधन संकट, वैश्विक परिस्थितियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब सरकारी संस्थान भी सख्त कदम उठाने लगे हैं. इसी कड़ी में हरियाणा के हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने एक बड़ा और अनोखा फैसला लिया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने ईंधन की बचत और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से कैंपस में कई नए नियम लागू कर दिए हैं. इन आदेशों के बाद अब कर्मचारियों और अधिकारियों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह फैसला देश में मौजूदा परिस्थितियों, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा ऊर्जा बचत और आर्थिक उपायों को लेकर दिए गए संदेश के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह कदम उठाया है.

शुक्रवार को साइकिल या पैदल आना होगा अनिवार्य

नए आदेश के अनुसार अब विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी हर शुक्रवार को साइकिल से या पैदल ही कैंपस पहुंचेंगे. प्रशासन इसे ‘नो व्हीकल डे’ की तरह लागू करना चाहता है. इसका मकसद न केवल ईंधन की खपत कम करना है, बल्कि लोगों को फिटनेस और पर्यावरण के प्रति भी जागरूक करना है. विश्वविद्यालय परिसर में इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें और वैकल्पिक साधनों को अपनाएं.

पेट्रोल-डीजल वाहनों पर सख्ती

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों का उपयोग कम करें. इसके बजाय इलेक्ट्रिक वाहन, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देने को कहा गया है. अगर किसी स्थिति में वाहन का उपयोग जरूरी हो, तो कार पूलिंग को अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन का मानना है कि इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ ट्रैफिक और प्रदूषण भी कम होगा.

विश्वविद्यालय ने सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती दिखाई है. अब केवल अत्यंत जरूरी और आपातकालीन स्थितियों में ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे. ट्रांसपोर्ट विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वाहन की मांग से जुड़ी फाइल को तभी मंजूरी दी जाए जब यात्रा वास्तव में जरूरी हो. सामान्य कार्यों और छोटी दूरी के लिए निजी या सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है.

ऑनलाइन और हाइब्रिड मीटिंग को बढ़ावा

ईंधन बचाने के लिए विश्वविद्यालय ने बैठकों के तरीके में भी बदलाव किया है. अब अधिकतर मीटिंग्स ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएंगी. प्रशासन का मानना है कि इससे अनावश्यक यात्राओं को रोका जा सकेगा और समय की भी बचत होगी. कई विभागों को पहले ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाने के निर्देश दिए जा चुके हैं.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिकारियों की बाहरी यात्राओं को भी सीमित कर दिया है. अब केवल बहुत जरूरी परिस्थितियों में ही बाहर जाने की अनुमति मिलेगी. अगर किसी अधिकारी को दूसरे शहर या जिले की यात्रा करनी भी पड़े, तो उन्हें सरकारी वाहन के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. इससे खर्च कम होगा और ईंधन की बचत भी होगी.

कुलपति ने दिए सख्त निर्देश

एचएयू के कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी डीन, विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं. उन्होंने साफ कहा कि आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है कि सभी कर्मचारी और अधिकारी इस पहल में सहयोग करें और ऊर्जा बचत के इस अभियान को सफल बनाएं.

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