नई दिल्ली: यमन एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय टकराव का मैदान बनता दिख रहा है. सऊदी अरब ने दक्षिणी यमन में संयुक्त अरब अमीरात समर्थित अलगाववादी बलों पर हवाई हमला किया है, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई. इस कार्रवाई के बाद पूरा इलाका युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया है.
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा दी थी. लंबे समय से सहयोगी रहे रियाद और अबू धाबी के बीच बढ़ता तनाव अब यमन में खुले टकराव की शक्ल लेता नजर आ रहा है.
शुक्रवार को सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी यमन में यूएई समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एसटीसी) के ठिकानों को निशाना बनाया. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 20 लोग मारे गए.
वादी हद्रामौत और हद्रामौत रेगिस्तान में एसटीसी के प्रमुख मोहम्मद अब्दुलमलिक ने बताया कि अल-खासा शिविर पर सात हवाई हमले किए गए, जिनमें 20 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हो गए. उन्होंने यह भी कहा कि इसी इलाके में एसटीसी के अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.
इससे पहले 30 दिसंबर को सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाह शहर मुकाला पर भी हवाई हमला किया था. रियाद का दावा था कि वहां यूएई द्वारा एसटीसी के लिए भेजे गए हथियारों और बख्तरबंद वाहनों की खेप मौजूद थी.
हालांकि, अबू धाबी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं का सम्मान करता है.
यमन संकट में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अलग-अलग पक्षों का समर्थन कर रहे हैं. सऊदी अरब राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ खड़ा है, जबकि यूएई दक्षिणी यमन में अलगाववादी आंदोलन चला रही एसटीसी का समर्थन करता है.
दिसंबर में एसटीसी ने सऊदी सीमा से सटे हद्रामौत और पड़ोसी महरा प्रांत के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था. रियाद इस कदम को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के तौर पर देखता है.
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार के हवाई हमले सऊदी गठबंधन बलों की नेशनल शील्ड फोर्सेज द्वारा हद्रामौत में सैन्य ठिकानों पर "शांतिपूर्वक" नियंत्रण स्थापित करने के अभियान शुरू करने के तुरंत बाद हुए.
सऊदी सेना के करीबी एक सूत्र ने एएफपी से कहा, "जब तक दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद दोनों प्रांतों से पीछे नहीं हट जाती, तब तक यह नहीं रुकेगा."
एसटीसी समर्थित दक्षिणी शील्ड बलों के प्रवक्ता मोहम्मद अल-नकीब ने सऊदी अरब पर “बड़े पैमाने पर हमले” में “मुस्लिम ब्रदरहुड और अल-कायदा के मिलिशिया” का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
X पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात यमन के 1994 के गृहयुद्ध जैसे हैं, “सिर्फ इतना फर्क है कि इस बार यह सऊदी विमानन अभियानों की आड़ में हो रहा है.”
संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा,"संयुक्त अरब अमीरात सऊदी अरब साम्राज्य की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता, उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति पूर्ण सम्मान और ऐसे किसी भी कार्य को अस्वीकार करता है जो साम्राज्य या क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है."
इसी बीच, मंगलवार को यमन सरकार ने औपचारिक रूप से संयुक्त अरब अमीरात से देश छोड़ने को कहा था.
सऊदी अरब 2015 से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करते हुए गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान समर्थित हूथियों को दक्षिणी सीमा पर सत्ता मजबूत करने से रोकना है. यूएई भी शुरुआत में इस गठबंधन का हिस्सा था, लेकिन समय के साथ उसने स्थानीय मिलिशिया और एसटीसी के जरिए दक्षिणी यमन में अपना अलग प्रभाव क्षेत्र बना लिया.
इसी रणनीतिक मतभेद ने अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को यमन के मैदान में आमने-सामने ला खड़ा किया है. First Updated : Saturday, 03 January 2026