Gaza Peace Summit: मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित गाजा पीस समिट के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफों के ऐसे पुल बांधे कि खुद ट्रंप भी मुस्कुराए बिना न रह सके. वैश्विक मंच पर मौजूद अन्य नेताओं की उपस्थिति में शहबाज ने ट्रंप को "शांति का प्रतीक" बताया और उन्हें दोबारा नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की घोषणा कर डाली.
सम्मेलन के दौरान पोडियम पर पहुंचते ही शहबाज शरीफ ने ट्रंप के नेतृत्व में गाज़ा में हुई शांति पहल की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि आज का दिन आधुनिक इतिहास के सबसे उल्लेखनीय दिनों में से एक है. राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति की स्थापना के लिए दिन-रात मेहनत की है और यह दिखाया है कि वे वास्तव में शांति के पुरुष हैं.
इसके बाद शहबाज ने कहा कि हम पहले भी भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने और फिर सीजफायर स्थापित करने में उनके योगदान के लिए उन्हें नोबेल के लिए नामांकित कर चुके हैं. आज एक बार फिर मैं उन्हें इस पुरस्कार के लिए नामित करना चाहता हूं. उनका योगदान दक्षिण एशिया में ही नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व में भी लाखों लोगों के जीवन को बचाने में रहा है.
शहबाज शरीफ ने यह भी दावा किया कि ट्रंप की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम हुआ था. जबकि भारत पहले ही इस दावे को खारिज कर चुका है और स्पष्ट कर चुका है कि यह सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संवाद से बनी थी, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से.
शहबाज की लंबी और अतिरंजित प्रशंसा को सुनते हुए इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी भी मंच पर मुस्कराते हुए नजर आईं. रिपोर्ट्स के अनुसार, मेलोनी ने मुंह पर हाथ रखकर पूरा भाषण ध्यान से सुना और उनके चेहरे पर आश्चर्य साफ झलक रहा था.
शहबाज शरीफ की बातों से खुश होकर डोनाल्ड ट्रंप खुद को रोक नहीं पाए और दोबारा मंच पर आकर मजाकिया अंदाज में बोले, "वाह! मुझे ये उम्मीद नहीं थी. अब तो घर चलना चाहिए. मेरे पास कहने को कुछ नहीं बचा." उन्होंने शहबाज का शुक्रिया अदा किया और उनकी प्रस्तुति को खूबसूरत बताया.
First Updated : Tuesday, 14 October 2025