नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव के बीच नई सरकार के गठन से पहले हलचल तेज हो गई है. आम चुनाव में बीएनपी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इसी दौरान अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस के कई करीबी सलाहकारों के देश छोड़ने या बाहर जाने की तैयारी की खबरों ने सियासी गलियारों में सवाल खड़े कर दिए हैं.
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भ्रष्टाचार विरोधी माहौल में मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी. 'ईमानदार प्रशासन' के दावे के साथ शुरू हुई इस पारी के अंत में अब उनके सहयोगियों के संभावित पलायन को लेकर बहस तेज हो गई है कि आखिर उन्हें किस बात का डर सता रहा है.
ढाका से प्रकाशित प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' ने अपनी एक रिपोर्ट में मोहम्मद यूनुस के करीबी सलाहकार फैज अहमद तैयब का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने जर्मनी के लिए फ्लाइट बुक कराई है. अखबार ने अपनी हेडलाइन में इसे 'सरप्राइज डिपार्चर' करार दिया, जिसकी काफी चर्चा हुई.
फैज अहमद तैयब अब तक यूनुस के सलाहकार के रूप में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल और टेलीकम्युनिकेशंस से जुड़े मामलों में सहयोग कर रहे थे. हालांकि बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक जानकारों ने इस घटनाक्रम पर आश्चर्य नहीं जताया. उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से संकेत मिल रहे थे कि यूनुस के करीबी देश से बाहर निकलने के विकल्प तलाश रहे हैं.
सोमवार शाम एनसीपी के वरिष्ठ नेता नसीरुद्दीन पटवारी ने भी इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि यूनुस के कुछ सलाहकार 'सेफ एग्जिट' की तलाश में हैं और इसकी जांच होनी चाहिए.
पटवारी ने कहा,"हमने सुना है कि बहुत से सलाहकार सेफ एग्जिट की तलाश में हैं. हम देश के लोगों और खुद सलाहकारों से अपील करते हैं कि सेफ एग्जिट से पहले कम से कम एक बार अपनी संपत्तियों की पूरी जानकारी दें. आप जनता को बताएं कि अपने कार्यकाल में आपने देश के लिए क्या किया है. इसके अलावा डॉ. युनूस को यह देश याद रखेगा कि उन्होंने इलेक्शन में किस तरह से मदद की."
सूत्रों के अनुसार, अंतरिम सरकार के सभी सलाहकार देश छोड़ने की तैयारी में नहीं हैं. फैज अहमद तैयब के विदेश रवाना होने की खबरों के बीच यह भी कहा जा रहा है कि अन्य कई नेता बांग्लादेश में ही रुक सकते हैं.
उनका मानना है कि सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण ढंग से हुआ है और ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ किसी तरह की हिंसा की आशंका नहीं है. मंगलवार को मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इसके साथ ही सभी शक्तियां नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को हस्तांतरित हो जाएंगी. शपथ ग्रहण समारोह में भारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी शामिल होंगे.
सलाहकारों के संभावित पलायन की पृष्ठभूमि अक्टूबर 2025 तक जाती है. एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने उस समय कहा था कि कुछ सलाहकार अलग-अलग राजनीतिक दलों से संपर्क में हैं और बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं. उन्हें आशंका है कि वे राजनीतिक विवादों में फंस सकते हैं.
एनसीपी के एक अन्य नेता सरजिस इस्लाम ने तो यहां तक कहा था कि सलाहकारों की स्वतंत्रता का एकमात्र रास्ता मौत है. इन बयानों से स्पष्ट है कि कुछ ही महीनों में मोहम्मद यूनुस की लोकप्रियता पर सवाल उठने लगे थे और राजनीतिक अस्थिरता की आशंका बढ़ गई थी. First Updated : Tuesday, 17 February 2026