सपने देखना बंद करें... ईरान के खामेनेई ने ट्रम्प के परमाणु दावों को किया खारिज, गाजा योजना को 'खोखला' बताया
Iran nuclear sites 2025 : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु साइट्स को पूरी तरह तबाह कर दिया है. खामेनेई ने इसे झूठा और धमकाने वाला बताया. ट्रंप ने जून में हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों को "सबसे सुंदर सैन्य ऑपरेशन" कहा था. इस टकराव ने अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता को प्रभावित किया है और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

Iran nuclear sites 2025 : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने जून में हुए हमलों में ईरान की परमाणु साइट्स को पूरी तरह तबाह कर दिया था. खामेनेई ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर जारी एक बयान में ट्रंप को "सपने देखने" की सलाह दी और कहा कि अमेरिका को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि किस देश को परमाणु तकनीक रखनी चाहिए या नहीं.
इजराइल और अमेरिका ने चलाया था अभियान
हालांकि, इन हमलों की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर मतभेद हैं. पेंटागन के अनुसार, हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम में 1 से 2 साल की देरी हुई है, जबकि गोपनीय अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में कहा गया कि यह देरी केवल कुछ महीनों की है.
"ईरान अब मिडिल ईस्ट का गुंडा नहीं रहा"
अमेरिका जैसे देश को तय करने का अधिकार नहीं
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने ट्रंप की इन टिप्पणियों को "गलत, अनुचित और धमकाने वाला" बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देश को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन से राष्ट्र को कौन-सी तकनीक अपनानी चाहिए. उनका यह बयान न केवल ट्रंप के दावों को खारिज करता है, बल्कि अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाता है.
परमाणु वार्ता पर पड़ी असर की छाया
इस पूरे घटनाक्रम का असर ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ताओं पर भी पड़ा है. ईरान और अमेरिका के बीच छठे दौर की बातचीत जून में होनी थी, लेकिन इज़राइली-अमेरिकी हमलों से ठीक दो दिन पहले यह सैन्य टकराव हुआ, जिससे बातचीत का माहौल खराब हो गया. अब ईरान ने साफ कह दिया है कि वह केवल तभी बातचीत करेगा जब अमेरिका सैन्य कार्रवाई न करने की गारंटी देगा.
क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा सवाल
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से न केवल परमाणु निरस्त्रीकरण की कोशिशों को झटका लगा है, बल्कि यह भी साफ होता जा रहा है कि पश्चिम एशिया की स्थिरता एक बार फिर खतरे में पड़ सकती है. इज़राइल की सीधी भागीदारी और अमेरिका का सैन्य समर्थन इस पूरे परिदृश्य को और भी जटिल बना रहा है.
टकराव किसी नए युद्ध की भूमिका...
ट्रंप के बयान और खामेनेई की प्रतिक्रिया के बीच सच्चाई कहीं बीच में छुपी हो सकती है. जहां अमेरिका और इजराइल ईरान की परमाणु क्षमता को एक खतरे के रूप में देख रहे हैं, वहीं ईरान इसे अपने अधिकार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक मानता है. अब यह देखना बाकी है कि परमाणु वार्ता की पटरी पर लौटना संभव होगा या फिर यह टकराव किसी नए युद्ध की भूमिका तैयार कर रहा है.


