नई दिल्लीः सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे यमन में दिखाई देने लगा है. शुक्रवार को सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी यमन में यूएई समर्थित अलगाववादी संगठन एसटीसी के ठिकानों पर हवाई हमले किए. इन हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. यह घटना उस वक्त हुई, जब सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने यूएई को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था.
रिपोर्ट के अनुसार, ये हमले यमन के हद्रामौत प्रांत में एसटीसी के अल-खासा सैन्य शिविर पर किए गए. एसटीसी के स्थानीय कमांडर मोहम्मद अब्दुलमलिक ने बताया कि इस शिविर पर कुल सात हवाई हमले हुए, जिनमें सात लड़ाकों की जान चली गई. उन्होंने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने जानबूझकर एसटीसी के ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है.
यमन लंबे समय से गृहयुद्ध और क्षेत्रीय शक्तियों के हस्तक्षेप का केंद्र रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब सऊदी अरब और यूएई जैसे करीबी सहयोगी खुले तौर पर आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं. जहां सऊदी अरब यमन के राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है, वहीं यूएई दक्षिणी यमन में सक्रिय एसटीसी का समर्थन करता रहा है, जो अलगाव की मांग कर रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्सेज ने हाल ही में हद्रामौत में सैन्य ठिकानों पर “शांतिपूर्वक नियंत्रण” स्थापित करने का अभियान शुरू किया था. इसी के कुछ समय बाद ये हवाई हमले किए गए. सऊदी सेना के करीबी एक सूत्र ने दावा किया कि जब तक एसटीसी दोनों प्रांतों से पीछे नहीं हटती, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है.
एसटीसी समर्थित दक्षिणी शील्ड बलों के प्रवक्ता मोहम्मद अल-नकीब ने सऊदी अरब पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने मुस्लिम ब्रदरहुड और अल-कायदा से जुड़े मिलिशिया का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर हमला कराया है. सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना 1994 के यमन गृहयुद्ध से की और कहा कि इस बार लड़ाई सऊदी हवाई अभियानों की आड़ में लड़ी जा रही है.
इससे पहले मंगलवार को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के बंदरगाह शहर मुकाला पर बमबारी की थी. रियाद का दावा था कि वहां यूएई द्वारा एसटीसी के लिए भेजे गए हथियारों और बख्तरबंद वाहनों की खेप मौजूद थी. हालांकि अबू धाबी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि वह सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं का सम्मान करता है.
यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह सऊदी अरब की संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगा जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा हो. साथ ही, मंत्रालय ने यमन में हथियार भेजने के आरोपों को निराधार बताया.
सऊदी अरब 2015 से यमन की सरकार के समर्थन में गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों को रोकना है. वहीं यूएई ने समय के साथ दक्षिणी यमन में अपनी अलग रणनीति अपनाई और स्थानीय मिलिशिया व एसटीसी के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया. यही रणनीतिक मतभेद अब दोनों देशों को आमने-सामने ले आए हैं और यमन एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष का केंद्र बनता दिख रहा है.
First Updated : Friday, 02 January 2026