ईरान वार्ता के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, पाक पीएम और सेना प्रमुख को बताया 'असाधारण'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की जमकर तारीफ की है. ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच दिए गए इस बयान में ट्रंप ने दोनों नेताओं को "असाधारण व्यक्ति" बताते हुए भारत-पाक युद्ध रोकने के अपने दावे को दोहराया, जिसे भारत पहले ही खारिज कर चुका है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की खुलकर सराहना की है. ट्रंप ने न केवल दोनों नेताओं को "असाधारण व्यक्ति" बताया, बल्कि भारत के साथ संभावित युद्ध को रोकने के अपने पुराने दावे को भी दोहराया.

रविवार को किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान में हुई एक अहम बैठक "अत्यंत सक्षम नेतृत्व" में आयोजित की गई थी. उन्होंने इस बैठक के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में प्रयासों की सराहना की, हालांकि भारत पहले ही उनके दावों को खारिज कर चुका है.

ट्रंप का बयान और पाक नेतृत्व की तारीफ

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, "मुझे उपराष्ट्रपति जेडी वैंस , विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर द्वारा इस्लामाबाद में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दयालु और अत्यंत सक्षम नेतृत्व में हुई बैठक के बारे में पूरी जानकारी दी गई है."

उन्होंने आगे दोनों नेताओं को “असाधारण व्यक्ति” बताते हुए कहा कि वे भारत के साथ संभावित बड़े युद्ध को रोकने के लिए उन्हें धन्यवाद देते रहते हैं.

30 से 50 मिलियन लोगों की जान बचाने का दावा

ट्रंप ने अपने बयान में कहा, "वे बहुत ही असाधारण व्यक्ति हैं, और भारत के साथ होने वाले एक भयावह युद्ध में 30 से 50 मिलियन लोगों की जान बचाने के लिए वे लगातार मेरा आभार व्यक्त करते हैं. यह सुनकर मुझे हमेशा खुशी होती है -जिस मानवता की बात की जा रही है, वह अकल्पनीय है,"

हालांकि, भारत ने इस दावे को पहले ही कई बार खारिज किया है और स्पष्ट किया है कि युद्धविराम में ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी.

भारत-पाक संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर

भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिन तक चला संघर्ष पिछले साल 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत शुरू हुआ था. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें भारत ने पाकिस्तानी क्षेत्र में मौजूद आतंकी लॉन्चपैड्स को निशाना बनाया था. 10 मई को युद्धविराम की घोषणा हुई थी, जिसका श्रेय ट्रंप लगातार लेते रहे हैं.

अमेरिका-ईरान वार्ता रही बेनतीजा

इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच छह सप्ताह से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. दोनों देशों ने इस विफलता के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है. इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा है.

जेडी वैंस और ईरानी नेताओं के बयान

इस्लामाबाद में हुई वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा, "बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं, और मुझे लगता है कि यह खबर ईरान के लिए अमेरिका के मुकाबले कहीं ज्यादा बुरी है."

वहीं, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह तेहरान का विश्वास जीतने में विफल रहा है. उन्होंने X पर कहा, "अमेरिका ईरान के तर्क और सिद्धांतों को समझ चुका है, और अब उन्हें यह तय करना है कि वे हमारा विश्वास जीत सकते हैं या नहीं."

परमाणु मुद्दा बना मुख्य बाधा

वार्ता में सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर रहा. वैंस के अनुसार, ईरान ने अमेरिका की शर्तों, जिसमें परमाणु हथियार न बनाने की बात शामिल थी, को स्वीकार नहीं किया.

बाद में ट्रंप ने कहा, "मैं विस्तार से बता सकता हूं और बहुत सी उपलब्धियों के बारे में बात कर सकता हूं, लेकिन केवल एक ही बात मायने रखती है -ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने को तैयार नहीं है!"

युद्धविराम बनाए रखने की अपील

ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका की “अत्यधिक” मांगें समझौते में बाधा बनीं. वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने युद्धविराम को बनाए रखना "अत्यंत आवश्यक” बताया.

रोम में पोप लियो ने भी स्थायी युद्धविराम की अपील करते हुए “प्रिय लेबनानी लोगों” के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.

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