ईरान-इजरायल युद्ध में उलझी दुनिया, उधर चीन ने PoK के पास बना दिया नया प्रांत!
यह चीन की शिनजियांग में स्थापित की गई तीसरी नई काउंटी है. इससे पहले भी चीन इस विवादित क्षेत्र में दो नए प्रांत बनाने की घोषणा कर चुका है, जिस पर भारत ने पहले ही सख्त आपत्ति दर्ज कराई थी.

पश्चिम एशिया ईरान-अमेरिका तनाव से जूझ रहा है, उसी दौरान चीन ने पाक अधिकृत कश्मीर और अफगानिस्तान की सीमा के निकट एक नई प्रशासनिक इकाई बनाने की खौफनाक चाल चली है. चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में सेनलिंग नाम की नई काउंटी स्थापित कर दी है, जो काराकोरम पर्वत श्रृंखला के पास स्थित है. यह कदम उइगरों की घुसपैठ रोकने और वाखान गलियारे की सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया माना जा रहा है.
यह नई काउंटी चीन की सीमा क्षेत्रों पर बढ़ते नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा है. भारत पहले ही चीन के ऐसे कदमों का विरोध जता चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीन को स्थानीय स्तर पर शासन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी.
सेनलिंग काउंटी की रणनीतिक स्थिति
सेनलिंग काउंटी काराकोरम माउंटेन रेंज के पास पाक अधिकृत कश्मीर और अफगानिस्तान बॉर्डर के बेहद करीब स्थित है. शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र की सरकार ने 26 मार्च को इस नई काउंटी की स्थापना की घोषणा की. हालांकि इसकी सीमाओं और प्रशासनिक हिस्सों की पूरी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है. यह नया जिला काशगर प्रशासन के अधीन आएगा. काशगर पुराने रेशम मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक शहर है, जो दक्षिण और मध्य एशिया को चीन से जोड़ता है और यहीं से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की शुरुआत होती है.
भारत पहले ही जता चुका है ऐतराज
भारत ने पिछले साल चीन द्वारा घोषित हेआन और हेकांग काउंटियों के निर्माण पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था. भारत ने स्पष्ट किया कि इन जिलों का कुछ हिस्सा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का अभिन्न अंग है और ऐसी किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हेआन काउंटी में विवादित अक्साई चिन पठार का बड़ा हिस्सा शामिल बताया जाता है, जो लद्दाख का हिस्सा है.
तीसरी नई काउंटी का गठन
सेनलिंग चीन द्वारा शिनजियांग में स्थापित की गई तीसरी नई काउंटी है. इससे पहले हेआन और हेकांग काउंटियों की घोषणा हो चुकी है. लगभग एक साल के अंदर चीन ने यह तीसरा नया प्रशासनिक जिला बना दिया है. विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम चीन के सीमा क्षेत्रों पर बढ़ते फोकस और नियंत्रण को साफ तौर पर दर्शाता है.
चीन का क्या प्लान?
शंघाई के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लिन मिनवांग ने कहा है कि यह कदम इस इलाके की रणनीतिक अहमियत को लेकर चीन की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है. रिपोर्ट के अनुसार, लिन ने कहा, व्यापक स्तर पर देखें तो, यह फैसला चीन द्वारा अपनी सीमावर्ती क्षेत्रों पर दिए जा रहे विशेष जोर का संकेत है. उन्होंने बताया कि यह नया जिला भौगोलिक रूप से अफगानिस्तान के संकरे वाखान कॉरिडोर से जुड़ा है. यह 74 किलोमीटर लंबी एक पट्टी है जो शिनजियांग की सीमा से लगती है और ताजिकिस्तान और PoK को अलग करती है. यह चीन की सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी चिंताओं को भी उजागर करता है.
चीन को पहले भी चिंता रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर अफगानिस्तान से शिनजियांग में घुस सकते हैं. अब विशेषज्ञों का मानना है कि नया जिला बनाने से चीन को स्थानीय स्तर पर शासन और नियंत्रण मजबूत करने में और भी ज्यादा मदद मिलेगी.


