मिडिल ईस्ट में उल्टा पड़ा ट्रंप का दांव! ईरान के जवाबी हमले में अमेरिका के THAAD मिसाइल डिफेंस को भारी नुकसान
ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार जॉर्डन में तैनात अमेरिका के महंगे THAAD के रडार सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा है.

वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला शुरू किया, तब माना जा रहा था कि तेहरान की सत्ता को कमजोर करना आसान होगा. शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत के बाद ऐसा लगने भी लगा था कि हालात जल्दी बदल सकते हैं. लेकिन एक हफ्ते के भीतर स्थिति उलटती नजर आई और ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने मिडिल ईस्ट में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. इन हमलों में कुछ जगहों पर अमेरिका की अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्रणाली को भी नुकसान पहुंचा है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी THAAD मिसाइल बैटरी के रडार सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा. यह हमला ईरान के खिलाफ अभियान के शुरुआती दिनों में ही हुआ बताया जा रहा है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात के कुछ सैन्य ठिकानों पर भी इसी तरह के रडार सिस्टम वाली इमारतों को निशाना बनाया गया. हालांकि वहां हुए नुकसान की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
रडार सिस्टम क्यों होता है इतना अहम
किसी भी मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए रडार सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. रडार दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानता है और उनके रास्ते का पता लगाकर उन्हें हवा में ही नष्ट करने में मदद करता है. अमेरिका के पास कुल आठ THAAD बैटरियां हैं. इनमें से दो संयुक्त अरब अमीरात में और एक सऊदी अरब में तैनात है. जिस बैटरी को निशाना बनाया गया, वह जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर तैनात थी. यह ठिकाना ईरान की सीमा से लगभग 800 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित है.
भारी आर्थिक नुकसान
THAAD प्रणाली में इस्तेमाल होने वाला AN/TPY-2 ट्रांसपोर्टेबल रडार काफी महंगा उपकरण माना जाता है. अमेरिका की मिसाइल डिफेंस एजेंसी के बजट के अनुसार, इसकी कीमत लगभग 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4500 करोड़ रुपये से अधिक होती है. इस एयर बेस को अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का अहम केंद्र माना जाता रहा है. ईरान के खिलाफ अभियान शुरू होने से पहले यहां 50 से ज्यादा फाइटर जेट, ड्रोन और परिवहन विमान मौजूद बताए जाते हैं. कई विमान विशेष शेल्टर में होने के कारण सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिखाई नहीं देते.
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा नुकसान
सैटेलाइट तस्वीरों में रडार सिस्टम के आसपास जमीन पर दो बड़े गड्ढे दिखाई दिए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यहां मिसाइल या ड्रोन हमला हुआ था. रडार सिस्टम करीब 40 फुट लंबे पांच ट्रेलरों में लगा होता है और तस्वीरों में इनमें से कई हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार यह हमला संभवतः 1 या 2 मार्च के आसपास हुआ. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के रुवैस और सदर क्षेत्र में स्थित कुछ सैन्य भवनों को भी 28 फरवरी से 1 मार्च के बीच निशाना बनाया गया.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रडार को नुकसान पहुंचना किसी भी मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए गंभीर झटका होता है. हालांकि इससे पूरी THAAD प्रणाली बंद नहीं होती, लेकिन उसकी क्षमता जरूर कम हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार AN-TPY-2 रडार को THAAD बैटरी का “दिल” कहा जाता है, क्योंकि यही इंटरसेप्टर मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करता है. इतना महंगा उपकरण खराब होने पर उसे तुरंत बदलना आसान नहीं होता. इसके लिए दूसरी जगह से नई यूनिट लाकर तैनात करनी पड़ती है, जिसमें समय और संसाधन दोनों लगते हैं.


