Trump Gaza Peace Plan: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश को रीपोस्ट किया है, जिसमें भारत ने गाजा संघर्ष खत्म करने के लिए ट्रंप की नई शांति योजना का समर्थन किया है. ट्रंप ने इस रीपोस्ट पर कोई शब्द नहीं जोड़े और सीधे मोदी का संदेश साझा कर दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप की गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना का स्वागत करता है. उन्होंने जोड़ा कि यह खाका फिलिस्तीनी और इजरायली जनता के साथ-साथ व्यापक पश्चिम एशिया क्षेत्र में दीर्घकालिक और सतत शांति, सुरक्षा और विकास का एक व्यवहार्य मार्ग प्रस्तुत करता है.
पीएम मोदी ने यह भी उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष राष्ट्रपति ट्रंप की इस पहल के पीछे एकजुट होंगे. भारत का यह रुख साफ संकेत देता है कि वॉशिंगटन की मध्यस्थता को नई दिल्ली का समर्थन प्राप्त है, जो दुनिया के सबसे पेचीदा संघर्षों में से एक को सुलझाने की कोशिश कर रही है.
व्हाइट हाउस ने सोमवार को गाजा संघर्ष समाप्त करने के लिए 20 सूत्रीय योजना जारी की. इसमें तत्काल युद्धविराम, बंधक-प्रिजनर अदला-बदली, चरणबद्ध इजरायली वापसी, हमास का निरस्त्रीकरण और एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की देखरेख में अंतरिम सरकार की स्थापना शामिल है.
यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ओवल ऑफिस में हुई बैठक के बाद सामने आया. बैठक के दौरान ट्रंप ने आशावादी रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक समझौते के बहुत करीब हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हमास योजना को ठुकराता है तो अमेरिका पूरी तरह इजरायल के साथ खड़ा रहेगा.
नेतन्याहू ने ट्रंप की तारीफ करते हुए उन्हें इजरायल का मित्र बताया, लेकिन योजना के कुछ पहलुओं को लेकर अपनी शंकाएं भी जताईं. खासकर फिलिस्तीनी प्राधिकरण में सुधार और लंबे समय से चली आ रही फिलिस्तीनी राज्य की मांग पर उन्होंने संकोच जताया.
दूसरी ओर, हमास ने कहा है कि वह गाजा शांति योजना पर अपने संगठन और अन्य फिलिस्तीनी गुटों के साथ चर्चा करने के बाद ही प्रतिक्रिया देगा. प्रस्ताव के अनुसार, हमास को युद्ध समाप्त करने, हथियार डालने, फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय मदद और गाजा पुनर्निर्माण के वादे के बदले संघर्ष विराम स्वीकार करना होगा.
अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ने के बीच ट्रंप ने कहा कि हमास के पास तीन से चार दिन का समय है जवाब देने के लिए. उन्होंने साफ किया कि इस पहल से क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुल सकती है, लेकिन अगर इसे ठुकराया गया तो अमेरिका इजरायल के साथ खड़ा रहेगा. First Updated : Wednesday, 01 October 2025