दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देशों थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे खूनी सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास तेज़ हो गए हैं. दोनों देशों के शीर्ष नेता मलेशिया में सोमवार को एक अहम मध्यस्थता बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं. इस बीच अमेरिका ने भी अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके विदेश मंत्रालय के अधिकारी मलेशिया पहुंच चुके हैं और शांति वार्ता में सहायता कर रहे हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त होते देखना चाहता है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी अधिकारी मलेशिया में मौजूद हैं और संघर्ष विराम के लिए जारी शांति प्रयासों में भागीदारी निभा रहे हैं. रुबियो के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं से बात कर तत्काल युद्धविराम की अपील की है.
थाई सरकार के अनुसार, कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के आमंत्रण पर इस अहम बैठक में हिस्सा लेंगे. साथ ही, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट के भी वार्ता में शामिल होने की संभावना जताई गई है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश एक-दूसरे पर सीमा क्षेत्र में हमला करने का आरोप लगा रहे हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार रात जारी एक बयान में कहा, “हम चाहते हैं कि यह संघर्ष जितना जल्दी हो समाप्त हो. हमारे विदेश मंत्रालय के अधिकारी मलेशिया में हैं और शांति प्रयासों में मदद कर रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है और लगातार दोनों देशों के नेताओं से संपर्क में है.
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर मई के अंत में शुरू हुई झड़प अब तक बड़े पैमाने पर हिंसा में तब्दील हो चुकी है. इस संघर्ष में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 13 थाई नागरिक और 8 कंबोडियाई नागरिक शामिल हैं. इसके अलावा लगभग 2 लाख लोगों को सुरक्षा कारणों से अपने घर छोड़ने पड़े हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दोनों देशों के नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि संघर्ष जारी रहा तो अमेरिका उनके साथ व्यापारिक समझौते को आगे नहीं बढ़ाएगा. “जब तक यह लड़ाई नहीं रुकती, अमेरिका किसी भी व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.
इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर भी दिखने लगा है. पहले से ही अस्थिर स्थिति से गुजर रही थाईलैंड की गठबंधन सरकार इस सीमा विवाद के चलते टूटने के कगार पर पहुंच गई है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की भारी तैनाती और राजनीतिक दबाव ने आंतरिक संकट को और गहरा कर दिया है.
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका की मौजूदगी और मध्यस्थता से इस हिंसक टकराव का कोई स्थायी समाधान निकल पाएगा या नहीं. इससे पहले ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का श्रेय भी खुद को दे चुके हैं, जिसे भारत ने सार्वजनिक रूप से खारिज किया था. अब देखना होगा कि थाईलैंड और कंबोडिया ट्रंप की इस पहल को किस रूप में स्वीकारते हैं. First Updated : Monday, 28 July 2025