पाकिस्तान में पानी पर मचा बवाल, सिंध-बलूचिस्तान में सूखे जैसे हालात, अर्थव्यवस्था पर भी संकट के बादल
पाकिस्तान के कई हिस्सों में पानी की कमी गंभीर रूप लेती जा रही है. हालात का असर खेती, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर दिखाई देने लगा है. वहीं, प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर भी विवाद बढ़ता जा रहा है.

नई दिल्ली: पाकिस्तान इस समय एक ऐसे जल संकट का सामना कर रहा है, जिसका असर केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, व्यापार और लाखों लोगों की आजीविका पर भी पड़ने लगा है. खासकर सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की कमी ने हालात को गंभीर बना दिया है. नहरों में घटते जल स्तर और प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर बढ़ते विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले महीनों में इसका असर खाद्य उत्पादन और अर्थव्यवस्था दोनों पर दिखाई दे सकता है.
सिंचाई विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, सिंध को मिलने वाले पानी में इस समय लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. सुक्कुर बैराज पर पानी की उपलब्धता जरूरत से काफी कम है, जिससे नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने में मुश्किलें बढ़ गई हैं. हालात यह हैं कि सिंध की प्रमुख नहरों को निर्धारित मात्रा से काफी कम पानी मिल रहा है. इसका सीधा असर खेती और ग्रामीण इलाकों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है. किसान लगातार चिंता जता रहे हैं कि पर्याप्त पानी न मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
अलग-अलग नहरों में गंभीर स्थिति
दादू नहर सबसे ज्यादा प्रभावित
दादू नहर की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है. यहां तय मात्रा के मुकाबले बहुत कम पानी पहुंच रहा है, जिससे आसपास के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई प्रभावित हो रही है.
खैरपुर फीडर वेस्ट और कोट्री बैराज में भी संकट
खैरपुर फीडर वेस्ट में भी पानी की बड़ी कमी दर्ज की गई है. वहीं कोट्री बैराज को उसके निर्धारित हिस्से का आधा पानी भी नहीं मिल पा रहा है. इससे निचले इलाकों में जल आपूर्ति और खेती दोनों प्रभावित हो रही हैं.
अन्य नहरों पर भी दबाव
उत्तर-पश्चिम नहर और राइस नहर जैसी महत्वपूर्ण जल परियोजनाएं भी कम जल प्रवाह से जूझ रही हैं. इन क्षेत्रों में खेती पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है, इसलिए पानी की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.
पंजाब पर अधिक पानी लेने के आरोप
सिंध के सिंचाई विभाग और किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि पंजाब अपने निर्धारित हिस्से से ज्यादा पानी ले रहा है. उनका कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों में अधिक पानी रोके जाने के कारण निचले प्रांतों तक पर्याप्त जल नहीं पहुंच पा रहा. सिंध के अधिकारियों का दावा है कि इस असंतुलन की वजह से वहां की नहरों में जल संकट और गहरा गया है. इसी कारण प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर बहस तेज हो गई है.
बलूचिस्तान में भी बढ़ी मुश्किलें
जल संकट का असर केवल सिंध तक सीमित नहीं है. बलूचिस्तान भी इस समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है. जल वितरण व्यवस्था के तहत उसे मिलने वाला पानी निर्धारित स्तर से काफी कम हो गया है. सीमा क्षेत्रों में जल प्रवाह की निगरानी की जा रही है, लेकिन कम उपलब्धता के कारण कई इलाकों में खेती और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने लगी है. स्थानीय लोगों और किसानों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है.
चावल उद्योग पर मंडरा रहा खतरा
सिंध का लारकाना क्षेत्र पाकिस्तान के प्रमुख चावल उत्पादक इलाकों में गिना जाता है. यहां बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है और हजारों लोगों की आजीविका इसी पर निर्भर करती है. व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि पानी की कमी लंबे समय तक बनी रही, तो चावल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. इसका असर न केवल किसानों पर पड़ेगा बल्कि चावल से जुड़े उद्योग और निर्यात क्षेत्र भी प्रभावित हो सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान संकट केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. यदि पानी की उपलब्धता में सुधार नहीं हुआ, तो खाद्यान्न उत्पादन, रोजगार और निर्यात पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. सिंचाई अधिकारियों ने उच्च स्तर पर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पानी की कमी के कारण कई जिलों में खेती की तैयारी और बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है.


