भारत-अमेरिका बैठक में गूंजा होर्मुज का मुद्दा, रूबियो ने जयशंकर के सामने रखी अमेरिकी सेना की सख्त शर्त
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियों के साथ फोन पर चर्चा की. इस दौरान जयशंकर ने अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों पर भारत की सख्त आपत्ति दर्ज की.

नई दिल्ली: ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना की तरफ से वाणिज्यिक जहाजों पर की गई कार्रवाई और तीन भारतीय नाविकों की मौत के कारण भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव अधिक बढ़ गया है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियों के साथ फोन पर चर्चा की. इस दौरान जयशंकर ने अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों पर भारत की सख्त आपत्ति दर्ज की. जिसे रूबियो ने अस्वीकार कर दिया। रूबियो ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में सभी जहाजों को अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन करना होगा.
तीन जहाजों पर हमले
बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का नजरिया कठोर था. उन्होंने जयशंकर को स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तत्काल पालन करना चाहिए. रूबियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध तस्करी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
तीन तेल टैंकरों पर हमला
यह विषय तब उत्पन्न हुआ जब जून के पहले सप्ताह में अमेरिकी सेना ने भारतीय क्रू मेंबर वाले तीन तेल टैंकरों पर हमला किया. 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले टैंकर 'मैरिवेक्स' पर अमेरिकी कार्रवाई हुई, जिसमें 24 भारतीय सवार थे. सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। 10 जून को पलाऊ के दूसरे टैंकर 'सेटेबेलो' पर अमेरिका ने हमला किया. इस हमले में 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मृत्यु हो गई. 11 जून को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर 'जलवीर' को निशाना बनाया गया, जिसमें 20 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद थे.
ट्रंप का अलग आरोप
भारत ने नई दिल्ली में शुक्रवार को अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब करते हुए कड़ा रुख अपनाया. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय नागरिकों पर अमेरिकी सेना के ये घातक हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं.
जानलेवा कार्रवाई उचित नहीं-जयशंकर
अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के बाद एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने लिखा, मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के उन हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति दोहराई है. जिनमें हमारे तीन नाविक मारे गए. कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ऐसी जानलेवा और हिंसक कार्रवाई को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता.


