अमेरिका-ईरान शांति समझौते में नया मौड़, ट्रंप ने किया आज हस्ताक्षर का दावा, ईरान ने कहा- तारीख तय नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच शांति समझौते को लेकर नई जानकारी सामने आई है। दोनों देशों के बयानों से संकेत मिला है कि दोनों पक्ष किसी साझा रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.

नई दिल्ली: कई महीनों से जारी तनाव, सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी के बाद अमेरिका और ईरान के संबंधों में नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं. दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर नजर बनी हुई है. हाल के बयानों से यह संकेत मिला है कि दोनों पक्ष किसी साझा रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि कुछ मुद्दों पर अभी भी अंतिम सहमति बनना बाकी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इससे क्षेत्र में स्थिरता आने की उम्मीद है. दूसरी ओर, ईरान ने भी यह स्वीकार किया है कि प्रस्तावित समझौते के मसौदे पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है. हालांकि ईरानी पक्ष का कहना है कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर की तारीख अभी तय नहीं हुई है और कुछ प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चर्चा
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि समझौता लागू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए पूरी तरह खुला रखा जाएगा. यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि ईरान का कहना है कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए कुछ और तकनीकी और राजनीतिक प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा. इसलिए किसी निश्चित समयसीमा को लेकर अभी सावधानी बरतने की जरूरत है.
पाकिस्तान ने भी जताई उम्मीद
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस संभावित समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और यदि समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रह सकती हैं ताकि सभी बिंदुओं को स्पष्ट रूप से लागू किया जा सके.
G7 बैठक में भी उठ सकता है मुद्दा
फ्रांस में आयोजित होने वाली जी7 बैठक के दौरान भी इस विषय पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि अमेरिकी नेतृत्व खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है.
यूरेनियम को लेकर की जाएगी बात
संभावित समझौते में परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट व्यवस्था चाहता है. वहीं ईरान का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, समझौते के कुछ प्रावधानों पर अभी भी बातचीत जारी है.
समुद्री सुरक्षा पर बढ़ी सतर्कता
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा गतिविधियां भी जारी हैं. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है कि समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए यह मार्ग बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है.
क्षेत्र में अन्य घटनाएं भी बनी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों के बीच पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष की घटनाएं अभी भी सामने आ रही हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौता हो जाता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देश बातचीत को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने में कितने सफल होते हैं.


