नई दिल्ली: कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान ने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस समझौते के लागू होते ही दोनों देशों के बीच चल रहा करीब चार महीने पुराना टकराव समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है.
अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने MoU पर हस्ताक्षर किए. बताया गया है कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान समझौते की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए.
इसके बाद दस्तावेज की प्रतियां ईरान और मध्यस्थ देशों को भेज दी गई. इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ इस दस्तावेज पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर कर चुके थे.
समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अभी भी तय मानी जा रही है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक का उद्देश्य नए हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि समझौते के क्रियान्वयन और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा करना होगा.
सूत्रों के अनुसार, अंतिम निर्णय अगले कुछ घंटों में लिया जा सकता है कि यह बैठक होगी या नहीं. चूंकि दस्तावेज पर पहले ही डिजिटल और औपचारिक हस्ताक्षर हो चुके हैं, इसलिए अलग से हस्ताक्षर समारोह की आवश्यकता नहीं रह गई है.
ईरान ने समझौते के तहत अपने तेल निर्यात पर लगी बाधाओं को हटाने की मांग रखी है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि देश को बिना परिवहन और बीमा संबंधी प्रतिबंधों के तेल बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए.
इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच आसान बनाने का आश्वासन भी दिया है. यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो ईरान को अपनी तेल बिक्री से होने वाली आय सीधे प्राप्त हो सकेगी.
दोनों देशों के बीच बनी सहमति के अनुसार अगले 60 दिनों तक संयम बनाए रखा जाएगा. इस दौरान कोई भी ऐसा राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे समझौते के क्रियान्वयन पर असर पड़े.
यह समझौता फिलहाल एक शुरुआती ढांचा है. आने वाले दो महीनों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि यह पहल स्थायी शांति और व्यापक समझौते का रूप ले पाती है या नहीं. First Updated : Thursday, 18 June 2026