US Israel attack on Iran : खामेनेई की मौत के बाद अलीरेजा अराफी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर

अमेरिका और इजरायल के द्वारा सैन्य हमले के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो गई. जिसके बाद सीनियर धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को ईरान का अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है. यह जानकारी समाचार एजेंसी ISNA के द्वारा दी गई है. अराफी नए सुप्रीम लीडर चुने जाने तक अस्थायी नेतृत्व परिषद का हिस्सा हैं. अब वे राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के साथ मिलकर अब देश की कमान संभालेंगे.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : ईरान के इतिहास में शनिवार का दिन एक बहुत बड़े और निर्णायक बदलाव का गवाह बना है. अमेरिका और इजराइल के भीषण सैन्य हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश में नेतृत्व का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए के मुताबिक. सीनियर धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफ़ी को अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है. अराफ़ी अब उस अस्थायी नेतृत्व परिषद का हिस्सा हैं जो नए सर्वोच्च नेता के चुनाव तक ईरान की सत्ता को नियंत्रित करेगी.

ये तीनों नेता देश का कामकाज चलाएंगे

आपको बता दें कि ईरान के संवैधानिक नियमों के तहत इस अंतरिम परिषद में राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान और मुख्य न्यायाधीश घोलम-होसैन मोहसेनी-एजेई के साथ अराफ़ी को शामिल किया गया है. ये तीनों अनुभवी नेता मिलकर वर्तमान अनिश्चितता के दौर में देश का कामकाज चलाएंगे. इसके अलावा. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के प्रमुख जनरल मोहम्मद पकपूर की मौत के बाद अहमद वहीदी को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है. वहीदी अब इस शक्तिशाली सैन्य बल की कमान संभालेंगे और हमले के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे.

कौन हैं अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी?

1959 में ईरान के यज़्द शहर में जन्मे 67 वर्षीय अलीरेज़ा अराफ़ी एक सम्मानित धार्मिक और राजनीतिक चेहरा हैं. उन्हें अयातुल्लाह की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त है. जो शिया धर्मगुरुओं के लिए सर्वोच्च सम्मान माना जाता है. अराफ़ी पहले अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं और 2013 से पवित्र शहर क़ोम में जुमे की नमाज़ पढ़ा रहे हैं. देश की धार्मिक शिक्षा प्रणाली के प्रमुख होने के नाते उनका ईरान की न्याय व्यवस्था और वैचारिक दिशा पर बहुत गहरा और व्यापक प्रभाव माना जाता है.

खामेनेई के विश्वसनीय सहयोगी रहे हैं अराफी 

अराफी लंबे समय से खामेनेई के विश्वसनीय सहयोगी रहे हैं और 2019 में वे गार्जियन काउंसिल के सदस्य बने थे. यह संस्था ईरान में चुनावों और कानूनों की समीक्षा करने वाली सबसे ताकतवर बॉडी है. वे सांस्कृतिक क्रांति की उच्च परिषद और धार्मिक मदरसों के प्रबंधन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं. 2021 में वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य चुने गए. उनके पास धार्मिक सिद्धांतों के साथ-साथ जटिल राजनीतिक कामकाज का भी दशकों का अनुभव है. जो वर्तमान सुरक्षा संकट में काफी मददगार साबित होगा.

आधुनिक तकनीक और AI का समर्थन

अराफ़ी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी प्रगतिशील और आधुनिक सोच मानी जाती है. जहां खामेनेई के बेटे मोजतबा को बहुत ज्यादा परंपरावादी माना जाता है. वहीं अराफ़ी आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने के मुखर समर्थक हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि इस्लामी सभ्यता को वैश्विक पटल पर आगे बढ़ाने के लिए धार्मिक संस्थाओं को नई तकनीकों का भरपूर उपयोग करना चाहिए. उनकी यह आधुनिक दृष्टि उन्हें ईरान के अन्य रूढ़िवादी नेताओं से काफी अलग. आधुनिक और भविष्यवादी नेता के रूप में पेश करती है.

भविष्य की बड़ी सुरक्षा चुनौतियां

ईरान के लिए यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है. क्योंकि देश ने न केवल अपना सर्वोच्च नेता खोया है. बल्कि सैन्य नेतृत्व में भी बड़ा फेरबदल हुआ है. अराफ़ी के नेतृत्व वाली अंतरिम परिषद के सामने सबसे बड़ा काम देश में आंतरिक शांति बनाए रखना और एक नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करना है. पूरी दुनिया की नजरें अब अराफ़ी के कूटनीतिक फैसलों पर टिकी हैं. क्योंकि उनकी नीतियों से ही यह तय होगा कि आने वाले समय में ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव क्या मोड़ लेगा.

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