इजरायल-ईरान टकराव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकर पर हमला, क्रू में भारतीय भी शामिल

इजरायल-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ऑयल टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें चार नाविक घायल हुए, जिनमें भारतीय भी शामिल हैं. इस घटना से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बाद हालात पहले ही नाजुक थे, लेकिन अब होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमला होने से तनाव और गहरा गया है. इस हमले में चार नाविक घायल हुए, जिनमें भारतीय क्रू सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं. ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, पलाऊ के झंडे वाला ‘स्काइलाइट’ नाम का ऑयल टैंकर इस हमले का निशाना बना. 

जहाज पर सवार क्रू में भारतीय और ईरानी नागरिक मौजूद थे. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है, लेकिन यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में ईरान की ओर से रेडियो संदेशों के जरिए इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी जा रही थी. इन संदेशों में जहाजों को ट्रांजिट से बचने की सलाह दी गई थी.

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यह खाड़ी क्षेत्र को हिंद महासागर से जोड़ता है और ईरान तथा ओमान के मुसंदम क्षेत्र के बीच स्थित है. लगभग 50 किलोमीटर चौड़ा यह रास्ता अपेक्षाकृत कम गहराई वाला है, जिसकी अधिकतम गहराई करीब 60 मीटर है.

यहीं से दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है. एशिया, यूरोप और उत्तर अमेरिका के बाजारों तक तेल पहुंचाने में इस मार्ग की अहम भूमिका है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट्स’ में से एक है. यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो तेल आपूर्ति के विकल्प बहुत सीमित रह जाते हैं.

बढ़ता जोखिम के चलते जलमार्ग बंद!

हालांकि ईरान ने आधिकारिक रूप से इस जलमार्ग को बंद करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन हालात को देखते हुए बीमा कंपनियों ने युद्ध-जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिए हैं. कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अस्थायी रूप से अपने शिपमेंट रोक दिए हैं. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है.

इस मार्ग से गुजरने वाला 80 प्रतिशत से अधिक तेल और गैस एशियाई बाजारों में जाता है. चीन, जो ईरान का बड़ा खरीदार है, उसके निर्यात का अधिकांश हिस्सा खरीदता है. ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

रणनीतिक द्वीप और क्षेत्रीय महत्व

होर्मुज के आसपास कई छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप स्थित हैं, जैसे होर्मुज, केशम और लारक. इसके अलावा ग्रेटर टुंब, लेसर टुंब और अबू मूसा जैसे विवादित द्वीप भी इसी क्षेत्र में आते हैं, जिन पर ईरान का नियंत्रण है. ये द्वीप समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिहाज से काफी अहम माने जाते हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag