क्या प्रियंका गांधी की होगी नई एंट्री? कांग्रेस संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव की अटकलें तेज
कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और प्रभारियों को बदल सकती है, जबकि प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल की नई भूमिकाओं पर भी नजर बनी हुई है.

नई दिल्ली: कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस संगठन में बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है. पार्टी नेतृत्व ने उनकी जगह वरिष्ठ नेता बी.के. हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है. इसके साथ ही संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस जल्द ही देशभर में संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल करने जा रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार कई राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदले जा सकते हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संगठन को नई दिशा दी जा सके.
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर हाल ही में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच विस्तृत चर्चा हुई है. माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में खरगे के कार्यकाल का यह अंतिम बड़ा संगठनात्मक पुनर्गठन होगा. पार्टी का मुख्य ध्यान उन राज्यों पर है जहां अगले डेढ़ वर्ष के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
अगले डेढ़ वर्ष के भीतर कहां-कहां चुनाव?
कांग्रेस विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों पर फोकस कर रही है, जहां अगले साल चुनाव प्रस्तावित हैं. इसके अलावा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव होने हैं. इन राज्यों में बेहतर चुनावी प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है.
पंजाब में प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की संभावना सबसे ज्यादा चर्चा में है. पार्टी के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि सामाजिक और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरे को जिम्मेदारी दी जा सकती है. संभावित नामों में विजय इंदर सिंगला और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं. कांग्रेस यहां आम आदमी पार्टी की सरकार के साथ-साथ भाजपा और अकाली दल की चुनौती का सामना कर रही है.
उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी हुई है. पार्टी की नजर खासतौर पर दलित मतदाताओं पर है. इसी कारण प्रदेश संगठन में बदलाव की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि प्रभारी या प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी दलित नेता को मौका दिया जा सकता है.
असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में संगठनात्मक बदलाव की चर्चा
इसके अलावा गोवा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी संगठनात्मक बदलाव की चर्चा है. कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष या प्रभारी के पद खाली होने वाले हैं, जबकि कुछ राज्यों में चुनावी हार के बाद नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ रही है. असम में प्रभारी के इस्तीफे के बाद नया चेहरा तलाशा जा रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल और बिहार में भी बदलाव की संभावनाएं बनी हुई हैं.
राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश से जुड़े संगठनात्मक पदों पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है. वहीं कांग्रेस के भीतर सबसे अधिक नजरें केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी की भूमिका पर टिकी हुई हैं. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आगामी फेरबदल में प्रियंका गांधी को कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
कुल मिलाकर कांग्रेस आगामी चुनावों और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर कई अहम नियुक्तियां और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.


