भारतीय क्षेत्र को लेकर दिया बयान, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की बढ़ी मुश्किलें, उठी इस्तीफे की मांग
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र बालेन शाह एक बार फिर राजनीतिक विवादों के घिरे में आ गए हैं. बता दें, भारत-नेपाल सीमा विवाद पर संसद में दिए गए उनके एक बयान ने नेपाल की राजनीति में हलचल मचा दी है.

नई दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र बालेन शाह एक बार फिर राजनीतिक विवादों के घिरे में आ गए हैं. बता दें, भारत-नेपाल सीमा विवाद पर संसद में दिए गए उनके एक बयान ने नेपाल की राजनीति में हलचल मचा दी है. वहीं उनके बयान के बाद विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कई राजनीतिक समूहों ने उनके उनके द्वारा दिए गए बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए इस्तीफे की मांग उठाना शुरू कर दी है. इसी बीच चलिए जानते है क्या है पूरा मामला?
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने क्या कहा
बता दें, संसद में सीमा विवाद पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि सीमा के कुछ हिस्सों में नेपाल की ओर से भी भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण हुआ है. वहीं उनके इस बयान के बाद देशभर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है. आलोचकों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी नेपाल के लंबे समय से चले आ रहे आधिकारिक रुख को कमजोर कर सकती है.
छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन
आगे प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को केवल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने इतिहासकारों, सर्वे एक्सपर्ट और तकनीकी टीमों की मदद से समाधान खोजने की बात कही है. हालांकि, उनके बयान के बाद काठमांडू समेत कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
बता दें, सर्वेक्षण विशेषज्ञोंसंगठनों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया है और प्रधानमंत्री से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की. इसके साथ ही संसद के भीतर भी विपक्षी सांसदों ने विरोध जताते हुए बयान को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है.
विदेश मंत्रालय ने दी सफाई
वहीं विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई जारी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सीमा पर मौजूद व्यावहारिक और स्थानीय स्तर के मुद्दों की ओर ध्यान दिलाना चाहते थे. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नेपाल अपने क्षेत्रीय दावों पर कायम है और सीमा संबंधी मामलों को सुलझाने के लिए भारत के साथ स्थापित तंत्रों के माध्यम से बातचीत जारी है.
क्या होगा विवाद का अंजाम
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे क्षेत्रों को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं. इसके अलावा दोनों देश अपने-अपने ऐतिहासिक और कानूनी आधारों पर दावा करते रहे हैं. वहीं अब कहा जा रहा है कि मौजूदा विवाद नेपाल सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है.


