डोनाल्ड ट्रंप का दो-टूक बयान, कहा ‘अमेरिकियों की आर्थिक दिक्कत से ईरान पर रुख नहीं बदलेगा’
जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या अमेरिकियों की आर्थिक परेशानी उन्हें तेहरान से समझौता करने पर मजबूर कर रही है, तो ट्रंप का जवाब था, "बिल्कुल नहीं।"

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार (13 मई 2026) को दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन के लिए बीजिंग पहुंचे। यहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होगी। रवाना होने से ठीक पहले ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका की खराब आर्थिक हालत का ईरान को लेकर उनकी नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एयर फ़ोर्स वन में चढ़ने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि वह युद्ध के आर्थिक नुकसान को लेकर बन रहे दबाव को नजरअंदाज कर रहे हैं।
ट्रंप की ईरान को दो-टूक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या अमेरिकियों की आर्थिक परेशानी उन्हें तेहरान से समझौता करने पर मजबूर कर रही है, तो ट्रंप का जवाब था, "बिल्कुल नहीं।" ट्रंप ने कहा, “मैं अमेरिकियों की आर्थिक स्थिति के बारे में नहीं सोच रहा। मैं किसी के बारे में नहीं सोचता। मैं सिर्फ एक चीज सोचता हूं- हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं लेने देंगे। बस।”
महंगाई चरम पर, फिर भी ट्रंप अडिग
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में महंगाई तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। नवंबर में मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप की आर्थिक नीतियों को लेकर अप्रूवल रेटिंग भी लगातार गिर रही है।
जब उनसे दोबारा पूछा गया कि क्या वह युद्ध के नतीजों को अनदेखा कर रहे हैं, तो ट्रंप और सख्त हो गए। उन्होंने कहा, “सबसे जरूरी बात यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हो। इसमें हमारा शेयर बाजार भी शामिल है, जो अभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। लेकिन बाजार ऊपर जाए या नीचे, अहम बात यही है कि ईरान न्यूक्लियर हथियार न बनाए। हर अमेरिकी यह समझता है।”
डेमोक्रेट्स को मिला नया मुद्दा
यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान से डेमोक्रेट्स को हमले का नया मौका मिल गया है। रिपब्लिकन पार्टी पहले से ही महंगाई और घरेलू खर्च को लेकर जनता के गुस्से का सामना कर रही है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद हालात और बिगड़े हैं। जवाब में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की कोशिश की। इसी रास्ते से दुनिया के तेल का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में ईंधन के दाम और बढ़ गए।
AAA के डेटा के अनुसार अमेरिका में रेगुलर गैसोलीन की औसत कीमत 4.50 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है। डीजल 5.64 डॉलर प्रति गैलन हो गया है। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने बताया कि अप्रैल में महंगाई 3.8 प्रतिशत रही, जो करीब तीन साल में सबसे ज्यादा है। इसमें 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा ऊर्जा की बढ़ी कीमतों का है। खाने-पीने, किराए और हवाई टिकट भी महंगे हुए हैं।
सर्वे में ट्रंप के लिए खतरे की घंटी
CNN के ताजा सर्वे में 70 प्रतिशत अमेरिकियों ने कहा कि वे ट्रंप के अर्थव्यवस्था संभालने के तरीके से नाखुश हैं। यह उनके दोनों कार्यकाल का सबसे खराब आंकड़ा है। पहले कार्यकाल में यह नाखुशी 50 प्रतिशत से ऊपर कभी नहीं गई थी। NBC News के सर्वे में भी दो-तिहाई लोगों ने ट्रंप के महंगाई और ईरान युद्ध को हैंडल करने के तरीके को नापसंद किया। करीब 10 में से 7 अमेरिकियों को लगता है कि अगले साल मंदी आ सकती है।
चीन की मदद की जरूरत नहीं
इन आंकड़ों के बावजूद ट्रंप ईरान नीति बदलने को तैयार नहीं हैं। बीजिंग पहुंचने से पहले उन्होंने यह भी कहा कि चीन इस संघर्ष को खत्म करने में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभा सकता। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ईरान के मामले में हमें किसी की मदद चाहिए, हम इसे हर हाल में जीतेंगे, शांति से या किसी और तरीके से।”
बीजिंग में हाई-प्रोफाइल दौरा
गौरतलब है कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा एक दशक में किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है। यह दौरा वाशिंगटन और ग्लोबल मार्केट के लिए अहम समय पर हो रहा है। बीजिंग में ट्रंप का भव्य स्वागत हुआ। मिलिट्री गार्ड ऑफ ऑनर, बैंड और सैकड़ों चीनी युवाओं ने झंडे लहराकर उनका स्वागत किया।
ट्रंप के साथ कारोबारी दिग्गजों का दल भी है। इसमें एलन मस्क, जेन्सेन हुआंग और Apple व Boeing के अधिकारी शामिल हैं। इस दौरे में व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अहम खनिजों और ईरान युद्ध के असर पर बात होगी।


