अमेरिका का चौथे दिन भी ईरान पर हमला, होर्मुज में फिर लागू हुई नाकाबंदी, ट्रंप बोले- अब पावर प्लांट और पुल होंगे निशाने पर

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है. अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब और तेज होता जा रहा है. अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया है. इसी बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाई का मकसद उन ईरानी क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा है. 

अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की समुद्री गतिविधियों पर दबाव बढ़ाते हुए एक बार फिर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है. इसका उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही सीमित करना और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है. अमेरिका का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और इसकी सुरक्षा हर हाल में जरूरी है.

ट्रंप ने दी नई सैन्य चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर फिर आक्रामक रुख अपनाया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका अगले चरण में बिजली संयंत्रों और प्रमुख पुलों जैसे अहम ढांचों को निशाना बना सकता है. फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि आने वाला सप्ताह ईरान के लिए और कठिन हो सकता है. 

उनके अनुसार, यदि समझौते की दिशा में कोई प्रगति नहीं होती, तो अमेरिकी हमलों का दायरा और बढ़ाया जाएगा. हालांकि ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी पहले की घोषणा वापस ले ली. उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों के अनुरोध पर यह फैसला बदला गया है और इसके बदले वे अमेरिका में व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए तैयार हैं.

चौथे दिन भी जारी रहे अमेरिकी हमले

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास, केशम द्वीप और आसपास के कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) ने दावा किया कि ईरान ने जॉर्डन स्थित उस सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जहां अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात हैं. इसी दौरान अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में अपनी नई नौसैनिक नाकाबंदी भी लागू कर दी. ईरान का कहना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच पहले हुए युद्धविराम और शांति वार्ता को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने समझौते पर जताई नाराजगी

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका द्वारा नाकाबंदी दोबारा लागू किए जाने के बाद पहले हुए समझौते का महत्व लगभग समाप्त हो गया है. उनके मुताबिक, इस फैसले से दोनों देशों के बीच विश्वास और बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई है.

अमेरिका ने लगाए गंभीर आरोप

CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने आरोप लगाया कि पिछले एक सप्ताह में ईरान ने कई नागरिक जहाजों को निशाना बनाया है. उनके अनुसार, सात व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में कई चालक दल के सदस्य मारे गए, घायल हुए या लापता हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं में संयुक्त अरब अमीरात के झंडे वाले एक जहाज पर सवार एक भारतीय नाविक की भी मौत हुई है.

बुशहर और केशम में बढ़ी सैन्य गतिविधियां

ईरान का आरोप है कि अमेरिकी सेना ने हालिया हमलों में केशम द्वीप के अलावा बुशहर क्षेत्र के कई स्थानों को निशाना बनाया. बुशहर में ईरान का एकमात्र नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र मौजूद है. इसके अलावा इराक और कुवैत की सीमा से लगे कुछ इलाकों में भी सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं. इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.

ईरान की ओर से ड्रोन हमलों की आशंका के बाद कुवैत ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है. कुवैती सेना ने बताया कि वह संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है. वहीं बहरीन में भी हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए. बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों और वहां रह रहे लोगों से शांत रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.

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