डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद, उनकी नीतियों और घोषणाओं पर हर जगह कड़ी निगरानी रखी जा रही है. ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को प्राथमिकता देते हुए आयात पर टैरिफ बढ़ाने और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने का वादा किया था. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही थी. हालांकि, रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत के लिए अब तक कुछ भी नकारात्मक नहीं हुआ है.
ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने पहले बड़े सार्वजनिक संबोधन में कहा कि टैरिफ बढ़ेंगे, लेकिन उतने नहीं जितना दुनिया ने सोचा था. उन्होंने अमेरिकी उत्पादन और तेल उत्पादन को प्राथमिकता देने का भी संकेत दिया.
रिपोर्ट में पता चला है कि शुरुआती 4 दिनों में ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत के लिए कुछ भी नुकसानदायक नहीं हुआ. ट्रंप ने ना तो भारी टैरिफ लगाए और ना ही ऐसा कोई कदम उठाया जो भारत के हितों के खिलाफ हो. तेल की कीमतें भी स्थिर हैं और डॉलर इंडेक्स 108 पर है, जो भारतीय बाजारों के लिए फिलहाल सकारात्मक संकेत है.
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप ने कहा कि हम अमेरिकी नागरिकों की मदद के लिए इतिहास की सबसे बड़ी टैक्स कटौती लाएंगे. यदि आप अमेरिका में अपना उत्पाद बनाएंगे, तो आपको सबसे कम टैक्स मिलेगा. लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते, तो आपको टैरिफ देना होगा, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और कर्ज कम होगा.
टैरिफ बढ़ने की संभावना के बीच, भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सरकार टैरिफ कम करने, व्यापार समझौते करने और अमेरिका से अधिक आयात करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है.
भारत अमेरिकी व्हिस्की, स्टील और तेल की खरीद बढ़ा सकता है. बोरबॉन और पेकन नट्स जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम कर सकता है. भारत पहले से ही अमेरिका के साथ $35.3 बिलियन का व्यापार अधिशेष रखता है और इन कदमों से संभावित संकट को टाला जा सकता है. First Updated : Friday, 24 January 2025