CBSE ने OSM में सेंध के दावों को नकारा, हैकर ने शुरू की 'URL की जंग'

इसमें असली छात्रों का डेटा या मार्क्स नहीं, बल्कि सैंपल डेटा रखा गया था। CBSE के मुताबिक उत्तर पुस्तिकाओं के असली मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाला पोर्टल अलग है और उसमें किसी तरह की सेंध नहीं लगी है।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में सुरक्षा में सेंध के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। बोर्ड ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ URL cbse.onmarks.co.in सिर्फ एक टेस्टिंग प्लेटफॉर्म था।

इसमें असली छात्रों का डेटा या मार्क्स नहीं, बल्कि सैंपल डेटा रखा गया था। CBSE के मुताबिक उत्तर पुस्तिकाओं के असली मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाला पोर्टल अलग है और उसमें किसी तरह की सेंध नहीं लगी है।

19 साल के छात्र के दावों से शुरू हुआ विवाद   

यह पूरा मामला 19 साल के एक छात्र के ऑनलाइन दावों के बाद गरमाया। इसी साल 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्र ने आरोप लगाया था कि फरवरी 2026 में CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगी थी।

ये आरोप ऐसे वक्त आए जब नतीजों के बाद की प्रक्रिया और नए OSM सिस्टम को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। कुछ छात्रों ने स्कैन की गई कॉपियों में गड़बड़ी और पुनर्मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी की शिकायत की थी।

टेस्टिंग साइट थी, असली पोर्टल नहीं!  

CBSE ने आधिकारिक बयान में कहा कि जिस URL का जिक्र किया गया वह मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ। बोर्ड ने बताया, "न तो उस URL की सुरक्षा में सेंध लगी है और न ही उसमें वे कमियां हैं जिनका जिक्र सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया है।"

बोर्ड के अनुसार यह साइट सिर्फ अंदरूनी समीक्षा के लिए थी। इसमें मूल्यांकन से जुड़ा कोई असली डेटा, अंक या छात्रों की जानकारी स्टोर नहीं थी। CBSE ने भरोसा दिलाया कि असली मूल्यांकन सिस्टम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और अब तक कोई सेंध नहीं मिली है।

ट्वीट डिलीट और नए URL पर बहस   

मंगलवार देर रात विवाद और बढ़ गया। उसी छात्र ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि CBSE ने पोर्टल में सेंध के दावों पर जारी अपना पहला स्पष्टीकरण वाला ट्वीट डिलीट कर दिया। CBSE के नए स्पष्टीकरण के बाद छात्र ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा साझा किए गए संशोधित URL में भी तकनीकी खामियां हैं। इससे सिस्टम की मजबूती पर बहस तेज हो गई।

पारदर्शिता के लिए लाया गया था OSM सिस्टम   

गौरतलब है कि CBSE ने इस साल मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए OSM सिस्टम शुरू किया था। बोर्ड का कहना है कि इसका मकसद मूल्यांकन में पारदर्शिता लाना और छात्रों की शिकायतों का समाधान करना था।

हालांकि कॉपियों तक पहुंच और पुनर्मूल्यांकन को लेकर छात्रों की शिकायतों के बाद यह सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया। CBSE ने दोहराया कि परिचालन मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और असली प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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