कभी ‘चाइना वायरस’ कहने वाले ट्रंप अब जिनपिंग के गुणगान में क्यों जुटे?
चीन दौरे पर पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें “दोस्त” बताया और दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होने की बात कही. हालांकि, ट्रंप के बदले तेवरों ने इसलिए हैरान किया क्योंकि वह पहले चीन पर लगातार तीखे हमले करते रहे हैं.

नई दिल्ली: चीन दौरे पर पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों अपने बदले हुए तेवरों को लेकर चर्चा में हैं. कभी चीन पर तीखे हमले करने वाले ट्रंप अब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ करते नजर आए. बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने जिनपिंग को अपना “दोस्त” बताया और कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्ते अब पहले से कहीं बेहतर होने वाले हैं.
ट्रंप ने की शी जिनपिंग के नेतृत्व की सराहाना
ट्रंप ने शी जिनपिंग को “महान देश का महान नेता” बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की. उन्होंने चीन में मिले भव्य स्वागत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सैन्य प्रस्तुति को “असाधारण” और “बेमिसाल” करार दिया. ट्रंप ने कहा कि चीन के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है और दोनों देशों के संबंध दुनिया के लिए बेहद अहम हैं.
अपने संबोधन में ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को व्हाइट हाउस का दौरा करेंगे. उन्होंने कहा कि वे इस मुलाकात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. ट्रंप ने अमेरिकी और चीनी जनता के बीच मजबूत रिश्तों के नाम जाम उठाते हुए कहा कि यह संबंध दोनों देशों के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा क्यों?
हालांकि ट्रंप के इस बदले हुए रवैये ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है. दरअसल, पिछले एक साल के दौरान ट्रंप कई बार चीन और शी जिनपिंग पर तीखे हमले कर चुके हैं. उन्होंने चीन पर अमेरिका में फेंटेनाइल जैसे नशीले पदार्थों के रसायन भेजने का आरोप लगाया था. फरवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन ने चीन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया.
कोविड-19 महामारी के दौरान भी ट्रंप ने चीन को निशाने पर लेते हुए वायरस को “चाइना वायरस” और “वुहान वायरस” कहा था. उन्होंने चीन पर अनुचित व्यापार, तकनीक चोरी और समझौतों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए थे. ऐसे में अब ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ करना कई लोगों को हैरान कर रहा है.
विश्लेषकों का क्या मानना है?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति कूटनीतिक दबाव बनाने का हिस्सा हो सकती है. ट्रंप पहले भी कई वैश्विक नेताओं की सार्वजनिक रूप से तारीफ कर चुके हैं और बाद में कड़े समझौते या दबाव की राजनीति अपनाते रहे हैं.
इस मुलाकात में व्यापार, ईरान संकट, होर्मुज स्ट्रेट, कृषि उत्पादों की खरीद और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई. व्हाइट हाउस के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए.
वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ताइवान मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो दोनों देशों के बीच टकराव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है.


