भारत के उत्तर प्रदेश में लागू 'योगी मॉडल' अब सिर्फ देशभर में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है. हाल ही में पाकिस्तान की संसद में भी इस मॉडल पर चर्चा देखने को मिली, जिसने राजनीतिक हलकों और मीडिया में हलचल पैदा कर दी है. विपक्षी सांसदों और कुछ सत्ताधारी दलों के नेताओं ने कानून व्यवस्था को लेकर 'योगी आदित्यनाथ मॉडल' की तारीफ की. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में एक सांसद ने पाकिस्तान के बजट और रेवेन्यू की तुलना भारत के राज्य उत्तर प्रदेश से की है.
वायरल हो रहे वीडियो में देख सकते हैं कि एक सांसद नेशनल असेंबली में अपनी बात रखते हुए कहते हैं कि भारत हमारा दुश्मन ही सही, लेकिन स्पीकर महोदय एक चीज तो देख लें जरा. मैं आपको कुछ फैक्ट्स और फिगर देता हूं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का टोटल बजट आउटले हमारा सिर्फ 62 बिलियन डॉलर है, जबकि इंडिया के एक स्टेट उत्तर प्रदेश का बजट आउटले 97 बिलियन डॉलर है. हमारा रिवेन्यू 50 बिलियन है, जबकि उत्तर प्रदेश का 80 बिलियन है. हमारा टैक्स रिवेन्यू उनके टैक्स रिवेन्यू से 16 बिलियन कम है.
यह पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान में योगी मॉडल की चर्चा पहली बार हुई हो. इससे पहले भी कानून व्यवस्था को लेकर पाकिस्तान में योगी मॉडल की चर्चा हो चुकी है. दरअसल, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांतों में हालिया अपराधों में तेजी, राजनीतिक अस्थिरता, और पुलिस तंत्र पर जनता का घटता भरोसा इस बहस की पृष्ठभूमि बना. संसद में चर्चा के दौरान विपक्षी नेता शेर अफगान ने कहा, "हमारे यहां अपराधी खुलेआम घूमते हैं, सरकार को योगी आदित्यनाथ जैसा नेतृत्व चाहिए जो अपराधियों से सख्ती से निपटे."
योगी आदित्यनाथ का प्रशासनिक मॉडल मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था, माफिया पर सख्ती, अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर एक्शन, तेज निर्णय और प्रशासनिक जवाबदेही पर आधारित है. उत्तर प्रदेश में इस मॉडल के तहत पुलिस को अधिक सशक्त किया गया, अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई हुई और अपराध नियंत्रण के साथ-साथ निवेशकों को सुरक्षित माहौल देने की कोशिश की गई. पाकिस्तानी मीडिया चैनलों और सोशल मीडिया पर भी "योगी मॉडल" ट्रेंड करने लगा. कुछ टीकाकारों ने इसे 'हिंदू राष्ट्रवादी प्रभाव' कहकर खारिज किया, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसे 'effective governance' का प्रतीक मान रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान में 'योगी मॉडल' जैसी कठोर नीति को लागू करना आसान नहीं होगा. वहां की लोकतांत्रिक संस्थाएं, सेना का प्रभाव, जातीय विविधता और मानवाधिकार संगठनों का दबाव इसे पूरी तरह अपनाने में बाधा बन सकता है. First Updated : Tuesday, 17 June 2025