1970 की तकनीक पर चल रही हैं आज की लिफ्टें? यूरोप की रिसर्च में सामने आया बड़ा खतरा
यूरोप में हुई एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि पुरानी लिफ्टें आज के लोगों के बढ़ते वजन और शरीर के आकार के हिसाब से सुरक्षित नहीं रह गई हैं. अगर डिजाइन पुराने हिसाब से ही बने रहेंगे तो इससे सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.

नई दिल्ली: 'यह लिफ्ट 16 लोगों के लिए है'- लिफ्ट में लिखा यह संदेश हम सभी ने कई बार देखा होगा. लेकिन क्या सच में आज की दुनिया में ये क्षमता सुरक्षित मानी जा सकती है? हाल ही में ब्रिटेन और यूरोप में हुई एक रिसर्च ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है. शोध में दावा किया गया है कि दशकों पहले बनाई गई कई लिफ्टें आज के लोगों के बढ़ते वजन और बदलती शारीरिक बनावट के हिसाब से सुरक्षित नहीं रह गई हैं.
तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित यूरोपीय कांग्रेस ऑन ओबेसिटी (ECO) में इस अध्ययन को पेश किया गया. रिसर्च में कहा गया कि मोटापे की बढ़ती समस्या के बावजूद लिफ्टों की तकनीक और उनकी वजन क्षमता में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए. यही वजह है कि पुराने डिजाइन वाली लिफ्टें अब जोखिम पैदा कर सकती हैं. इस अध्ययन का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय प्रेडर-विली सिंड्रोम संगठन के अध्यक्ष प्रोफेसर निक फाइनर ने किया. उन्होंने यूरोप के कई देशों में 1972 से 2024 के बीच बनाई गई 112 लिफ्टों का अध्ययन किया.
पुराने मानकों पर बनी हैं कई लिफ्टें
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने लिफ्टों में लिखी वजन सीमा और यात्रियों की संख्या का विश्लेषण किया. इसके बाद इन आंकड़ों की तुलना उस दौर के लोगों के औसत वजन से की गई, जब ये लिफ्टें बनाई गई थीं. शोध में सामने आया कि 1970 के दशक में ब्रिटेन में पुरुषों का औसत वजन करीब 75 किलो और महिलाओं का औसत वजन लगभग 65 किलो था. लेकिन अब पुरुषों का औसत वजन बढ़कर 86 किलो और महिलाओं का 73 किलो तक पहुंच चुका है. इसके बावजूद कई पुरानी लिफ्टों की क्षमता में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ.
लिफ्ट डिजाइन में हुई बड़ी गलती
प्रोफेसर निक फाइनर ने बताया कि समय के साथ लिफ्ट डिजाइन करने वाली कंपनियों ने वजन की बजाय लोगों के शरीर द्वारा घेरने वाली जगह पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया. कंपनियों ने मान लिया कि लोग कम जगह में फिट हो जाएंगे, लेकिन मोटापे के बढ़ते स्तर को सही तरीके से नहीं समझा गया. उन्होंने कहा कि अब लोगों के शरीर का आकार और वजन दोनों बढ़े हैं, इसलिए उन्हें लिफ्ट में ज्यादा जगह की जरूरत पड़ती है. अगर डिजाइन पुराने हिसाब से ही बने रहेंगे तो इससे सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
भारत में भी बढ़ रही मोटापे की समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिंता सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है. भारत में भी मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मोटापे की दर 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है. रिपोर्ट में बताया गया कि दक्षिण भारत में मोटापे का प्रतिशत सबसे ज्यादा है, जबकि पूर्वी भारत में यह अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में भारत में भी पुरानी लिफ्टों की क्षमता और सुरक्षा की जांच जरूरी मानी जा रही है.
रिसर्च में यह भी कहा गया कि अगर लिफ्टें वास्तविक जरूरत के हिसाब से डिजाइन नहीं की गईं तो मोटापे से जूझ रहे लोगों के साथ भेदभाव बढ़ सकता है. कई बार वजन सीमा पूरी होने पर कुछ लोगों को लिफ्ट से बाहर रहना पड़ता है, जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. प्रोफेसर फाइनर ने कहा कि समाज को अब सार्वजनिक सुविधाओं को नए दौर की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना होगा. अगर ऐसा नहीं किया गया तो मोटापे से प्रभावित लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी और मुश्किल हो सकती है.


