मुलायम-साधना की प्रेम कहानी, कैसे प्रतीक यादव को मिला था नेताजी के बेटे का दर्जा?
मुलायम सिंह यादव का निजी जीवन हमेशा चर्चा में रहा. उनकी पहली पत्नी मालती देवी थीं, जिनसे अखिलेश यादव का जन्म हुआ. लेकिन बाद में मुलायम सिंह की जिंदगी में साधना गुप्ता आई. जिसके बाद उनका पूरा जीवन बदल गया.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली सैफई परिवार पर बुधवार को दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बता दें, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का लखनऊ में निधन हो गया. बताया जा रहा है कि सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. वहीं उनके निधन की खबर से परिवार, समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में शोक की लहर फैल गई है.
राजनीति से रहते थे दूर
प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहकर अपना निजी और कारोबारी जीवन जीते थे. वह भाजपा नेता और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष अपर्णा यादव के पति थे. साथ ही बता दें, प्रतीक, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव उनके सौतेले भाई हैं.
क्या थी प्रेम कहानी
मुलायम सिंह यादव का निजी जीवन हमेशा चर्चा में रहा. उनकी पहली पत्नी मालती देवी थीं, जिनसे अखिलेश यादव का जन्म हुआ. लेकिन बाद में मुलायम सिंह की जिंदगी में साधना गुप्ता आई. दोनों की मुलाकात उस दौर में हुई जब मुलायम सिंह प्रदेश राजनीति में तेजी से उभर रहे थे. साधना गुप्ता समाजवादी विचारधारा से जुड़ी थीं और मुलायम सिंह के परिवार के करीब आती चली गई. कहा जाता है कि मुलायम सिंह की मां की बीमारी के दौरान साधना ने उनकी खूब सेवा की थी, जिस दौरान दोनों का रिश्ता और मजबूत हो गया.
2007 में स्वीकार किया रिश्ता
हालांकि इस रिश्ते को लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया गया. परिवार और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण साधना गुप्ता सालों तक पर्दे के पीछे रहीं. साल 2003 में मालती देवी के निधन के बाद परिस्थितियां बदलीं और 2007 में एक हलफनामे के जरिए मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से साधना गुप्ता को अपनी पत्नी और प्रतीक यादव को अपना बेटा स्वीकार किया. साधना गुप्ता का निधन जुलाई 2022 में हुआ था, जबकि कुछ महीनों बाद अक्टूबर 2022 में मुलायम सिंह यादव भी दुनिया को अलविदा कह गए. अब प्रतीक यादव के निधन के साथ सैफई परिवार के उस अध्याय का भी अंत हो गया, जो मुलायम सिंह यादव के दूसरे परिवार की पहचान माना जाता था.


