Fake office friends: ऑफिस में दोस्ती करना आम बात है. साथ काम करने वाले लोग धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आते हैं और आपसी समझ विकसित होती है. कई बार यह दोस्ती असली होती है, लेकिन कई बार यह केवल दिखावे की होती है. ऑफिस की चकाचौंध और कॉर्पोरेट माहौल में कई ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो सामने से दोस्त बनते हैं, लेकिन पीछे से आपके खिलाफ साजिश रचते हैं.
ऐसे नकली ऑफिस फ्रेंड्स आपकी तरक्की की राह में रोड़ा बन सकते हैं. वे आपके काम में टांग अड़ा सकते हैं, आपकी छवि को खराब कर सकते हैं और बॉस के सामने खुद को बेहतर साबित करने के लिए आपकी गलतियां उजागर कर सकते हैं. ऐसे में इनकी पहचान करना और सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है.
ऐसे नकली दोस्त अक्सर आपके सामने तारीफों के पुल बांधते हैं, लेकिन जैसे ही आप वहां से हटते हैं, वे आपकी बुराई करने लगते हैं. वे ऑफिस गॉसिप का हिस्सा बनते हैं और आपकी निजी बातों को दूसरों में फैलाते हैं. वो सामने से तो बहुत फ्रेंडली है, लेकिन मेरी छोटी सी गलती को भी बॉस तक पहुंचा देती है.
नकली ऑफिस फ्रेंड्स आपकी उपलब्धियों से खुश नहीं होते. अगर आपको प्रमोशन मिला है या आपके काम की सराहना हुई है, तो वे ईर्ष्या से भर जाते हैं. वे कोशिश करते हैं कि आपकी छवि को खराब किया जाए या आपकी सफलता को छोटा दिखाया जाए.
जब भी आपको किसी काम में मदद की जरूरत होती है, ऐसे लोग किनारा कर लेते हैं. चाहे वह किसी रिपोर्ट की तैयारी हो या प्रोजेक्ट की डेडलाइन वे मदद का वादा तो करते हैं, लेकिन वक्त पर कहीं नजर नहीं आते.
नकली दोस्त कभी भी आपकी गलतियों को छुपाने या सुधारने की कोशिश नहीं करते, बल्कि उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर मैनेजमेंट तक पहुंचाते हैं. वे दूसरों के सामने भी आपको नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं.
ये लोग आपके हर कदम की तुलना अपने आप से करते हैं. अगर आपने कोई अच्छा आइडिया दिया, तो वे उसका क्रेडिट लेने की कोशिश करेंगे. अगर आपकी प्रेजेंटेशन बेहतर रही, तो वे उसकी नकल कर आगे बढ़ने की फिराक में रहेंगे.
ऐसे लोग आपकी व्यक्तिगत बातें, विचार या स्ट्रैटेजी दूसरों को बता देते हैं. वे आपके भरोसे का गलत फायदा उठाते हैं. इनकी वजह से आपकी छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
अपनी निजी बातें ऑफिस में कम से कम शेयर करें.
हर किसी को तुरंत भरोसे में न लें.
अगर किसी की बातों और काम में फर्क लगे, तो सतर्क हो जाएं.
टीमवर्क में हिस्सा लें, लेकिन व्यक्तिगत सीमाओं का ध्यान रखें.
जरूरत पड़ने पर HR या सीनियर से सलाह लें.