अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीज़ा शुल्क को 1,00,000 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने की घोषणा ने प्रवासी समुदाय, खासकर भारतीय पेशेवरों में हड़कंप मचा दिया है. यह निर्णय 19 सितंबर को सामने आया और 21 सितंबर से नई समयसीमा लागू होने के कारण लाखों वीजा धारक असमंजस की स्थिति में आ गए. चूंकि एच-1बी वीजा धारकों में 70% से अधिक भारतीय हैं, इसलिए इस कदम का सबसे बड़ा असर भारतीय समुदाय पर देखा जा रहा है.
इस फैसले का सबसे नाटकीय असर सैन फ्रांसिस्को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देखने को मिला. एमिरेट्स की एक उड़ान में कई यात्री नई नीति की खबर सुनते ही घबरा गए. सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में भारतीय यात्रियों को विमान से उतरते और एयरपोर्ट के गलियारों में इधर-उधर भागते हुए देखा गया. बताया गया कि उड़ान तीन घंटे से अधिक समय तक रुकी रही क्योंकि यात्री यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि अब आगे क्या करना है. इनमें से कई लोग दुर्गा पूजा और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होकर अमेरिका लौट रहे थे.
वीजा नियमों में बदलाव की खबर फैलते ही भारत से अमेरिका जाने वाली उड़ानों की टिकटें रिकॉर्ड स्तर तक महंगी हो गईं. आमतौर पर 800 से 1,000 डॉलर में मिलने वाला टिकट अचानक 4,500 डॉलर तक पहुंच गया. यात्रियों की भीड़ और घबराहट का फायदा उठाते हुए एयरलाइंस ने कथित रूप से कीमतों को और बढ़ा दिया. इस वजह से जिन परिवारों की यात्रा पहले से तय थी, उन्हें भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ा.
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला कई भारतीय एच-1बी वीजा धारकों के लिए संकट खड़ा कर सकता है. जिन लोग भारत या अन्य देशों में छुट्टियां मना रहे हैं, उनके पास अमेरिका लौटने के लिए बेहद कम समय है. अगर वे 21 सितंबर तक वापस नहीं पहुँच पाए, तो उनके वीज़ा की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं. न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध इमिग्रेशन वकील साइरस मेहता ने चेतावनी दी कि समयसीमा चूकने वाले वीज़ा धारकों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर अमेरिकी टेक कंपनियों पर भी पड़ने की संभावना है. माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, गूगल और मेटा जैसी कंपनियां हजारों भारतीय एच-1बी पेशेवरों पर निर्भर हैं. अचानक हुए इस बदलाव ने न सिर्फ कर्मचारियों को असमंजस में डाला, बल्कि कंपनियों की कार्यशैली पर भी दबाव बढ़ाया है. कई कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को जल्द से जल्द अमेरिका लौटने या फिलहाल वहीं रुकने की सलाह दे रही हैं.
भारत सरकार ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम पर चिंता जताई है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे इस फैसले के निहितार्थों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं और भारतीय कर्मचारियों पर इसके संभावित प्रभावों को समझने की कोशिश कर रहे हैं. मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि इस कदम से न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानवीय स्तर पर भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.
First Updated : Sunday, 21 September 2025