Holi 2026: भारत के इन गांवों में नहीं खेली जाती होली, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
जहां पूरा देश होली के रंगों में सराबोर रहता है, वहीं उत्तराखंड, झारखंड और गुजरात के कुछ गांवों में वर्षों से यह त्योहार नहीं मनाया जाता. धार्मिक मान्यताओं, श्राप और परंपराओं के कारण यहां होली के दिन सन्नाटा छाया रहता है.

रंगों, खुशियों और मिलन का पर्व होली जैसे ही आता है, पूरा देश उत्साह से भर उठता है. गलियों में गुलाल उड़ता है, ढोल की थाप पर लोग झूमते हैं और हर चेहरा रंगों से सराबोर नजर आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहां होली के दिन न ढोल बजते हैं और न ही रंग उड़ते हैं? यहां इस दिन अजीब सा सन्नाटा छाया रहता है. इन जगहों पर होली न मनाने के पीछे धार्मिक मान्यताएं और पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं.
उत्तराखंड के शांत गांव
उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में कुरझां और क्विली नाम के दो गांव हैं, जहां करीब 150 वर्षों से होली नहीं खेली जाती. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि उनकी आराध्य देवी त्रिपुर सुंदरी को शोर-शराबा पसंद नहीं है. इसलिए देवी के सम्मान में गांव वाले इस दिन पूरी शांति बनाए रखते हैं. यहां होली का दिन अन्य दिनों की तरह ही सामान्य रहता है.
झारखंड का दुर्गापुर गांव
झारखंड के बोकारो जिले के दुर्गापुर गांव में भी होली नहीं मनाई जाती. कहा जाता है कि करीब 100 साल पहले गांव के राजा के बेटे की मृत्यु होली के दिन हुई थी. कुछ समय बाद स्वयं राजा का निधन भी इसी दिन हो गया. मरने से पहले राजा ने आदेश दिया कि गांव में कभी होली नहीं मनाई जाएगी. तब से ग्रामीण इस परंपरा का पालन कर रहे हैं. उनका विश्वास है कि इस नियम को तोड़ने पर अनहोनी हो सकती है.
गुजरात का रामसन गांव
गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित रामसन गांव में लगभग 200 वर्षों से होली नहीं खेली जाती. लोककथाओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान राम यहां आए थे. कुछ कथाएं यह भी कहती हैं कि संतों ने गांव के राजा के व्यवहार से दुखी होकर श्राप दिया था. तभी से यहां रंगों का यह त्योहार नहीं मनाया जाता.
तमिलनाडु की अलग परंपरा
दक्षिण भारत के तमिलनाडु में होली उतनी धूमधाम से नहीं मनाई जाती, जितनी उत्तर भारत में. यहां उसी समय ‘मासी मागम’ पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों की आत्माएं पवित्र जल में स्नान करने आती हैं. लोग अपने पितरों को श्रद्धांजलि देते हैं. इसी कारण यहां होली की रौनक कम दिखाई देती है.


