भगवान विष्णु की कृपा डबल! मार्च महीने में पड़ेंगे 2 एकादशी व्रत, यहां जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और खास महत्व

मार्च महीनें में दो महत्वपूर्ण एकादशी पड़ रही हैं, पहला पापमोचनी एकादशी और दूसरा कामदा एकादशी. इन दोनों दिन का अपना एक अलग-अलग महत्व है. साथ ही पूजा विधि भी अलग है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत बहुत पवित्र माना जाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है. मार्च 2026 में दो महत्वपूर्ण एकादशी पड़ रही हैं, पहला पापमोचनी एकादशी और दूसरा कामदा एकादशी. इन व्रतों से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है.

एकादशी व्रत का सामान्य महत्व

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की भक्ति का मुख्य तरीका है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत करने से पिछले जन्मों के पाप मिटते हैं और पुण्य बढ़ता है. तुलसी पूजन, विष्णु पूजा और कथा सुनना बहुत फायदेमंद होता है. इस दिन तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ते, इसलिए पहले से तैयार रखें. व्रत में फलाहार या एक समय का भोजन लें. पारण द्वादशी पर करना चाहिए.

पापमोचनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त

तिथि शुरू: 14 मार्च 2026, सुबह 8:10 बजे  

तिथि खत्म: 15 मार्च 2026, सुबह 9:16 बजे  
व्रत की तारीख: 15 मार्च 2026 (रविवार)  
पारण समय: 16 मार्च 2026, सुबह 6:30 से 8:54 बजे तक

पापमोचनी एकादशी का महत्व और पूजा विधि

यह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है. इसका नाम पापमोचनी इसलिए है क्योंकि यह सभी पापों से मुक्ति देती है. ब्रह्मांड पुराण में इसका जिक्र है. व्रत से पाप नाश होते हैं, संतान सुख मिलता है, शिक्षा में सफलता आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

पूजा में सुबह स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें. पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति रखें. केसर-हल्दी तिलक, पीले फूल, तुलसी दल चढ़ाएं. दीपक-धूप जलाएं, कथा पढ़ें, आरती करें और भोग लगाएं. दान में भोजन या कपड़े दें.

कामदा एकादशी की तिथि और मुहूर्त

तिथि शुरू: 28 मार्च 2026, सुबह 8:45 बजे  
तिथि खत्म: 29 मार्च 2026, सुबह 7:46 बजे  
व्रत की तारीख: 29 मार्च 2026 (रविवार)  
पारण समय: 30 मार्च 2026, सुबह 6:14 से 7:09 बजे तक

कामदा एकादशी का महत्व और पूजा विधि

यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है. कामदा एकादशी नाम से ही पता चलता है कि यह मनोकामनाएं पूरी करती है. इस व्रत से इच्छाएं पूरी होती हैं. पूजा में विष्णु, तुलसी और गौ माता का विशेष पूजन करें. शालिग्राम या गोपाल जी स्थापित करें.

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र 108 बार जपें. तुलसी की 7 परिक्रमा करें. गाय को रोटी-गुड़ खिलाएं. आंवला, पीपल और बरगद की पूजा भी करें. दान में अन्न या मिठाई दें.

Disclaimer: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. किसी भी निर्णय से पहले अपनी समझ और विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.

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