Sawan purnima date and time: सावन माह की पूर्णिमा तिथि को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है. यह तिथि भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन महीने का अंतिम दिन होता है, जिसे श्रद्धा और भक्ति के साथ सावन पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. यही वह दिन है जब रक्षा बंधन का पर्व भी पूरे देश में बड़े उल्लास से मनाया जाता है. बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं. हालांकि इस वर्ष सावन पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान एक ही दिन नहीं, बल्कि अलग-अलग तिथियों पर होंगे. ऐसे में जानना जरूरी है कि कब रखा जाए व्रत, कब किया जाए स्नान और दान, और क्या हैं शुभ मुहूर्त.
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे प्रारंभ होकर 9 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे समाप्त होगी. चूंकि उदया तिथि 9 अगस्त को है, इसलिए सावन पूर्णिमा 9 अगस्त को मानी जाएगी.
हालांकि, व्रत रखने वाले श्रद्धालु 8 अगस्त को व्रत रखेंगे, क्योंकि इस दिन चंद्रोदय शाम 6:42 बजे होगा, और पूर्णिमा व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य होता है.
पूर्णिमा व्रत करने वालों के लिए 8 अगस्त को उपवास रखना श्रेष्ठ माना गया है. इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजन किया जाएगा. मान्यता है कि इस व्रत से मानसिक शांति, समृद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं.
सावन पूर्णिमा पर पुण्य स्नान और दान 9 अगस्त को किया जाएगा. सावन पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:22 से 5:04 बजे तक स्नान करना माना गया अत्यंत फलदायी होगा. इसके अलावा अन्य प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:40 बजे से 3:33 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:06 बजे से 7:27 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 5:47 बजे से दोपहर 2:23 बजे तक
मान्यता है कि सावन पूर्णिमा के दिन गंगा जैसे पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्यानुसार दान करने से जातक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. यह पुण्य जन्मों तक फलदायी माना जाता है और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि आती है.
Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.
First Updated : Wednesday, 30 July 2025