Vikat Sankashti Chaturthi: क्या आप जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का रहस्य? ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा, हर संकट होगा दूर
विकट संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने से जीवन के संकट दूर होते हैं. चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है और श्रद्धा से की गई आराधना सुख, शांति और समृद्धि लाती है.

संकटों को दूर करने और जीवन में सुख-शांति लाने वाला पावन पर्व संकष्टी चतुर्थी आज पूरे श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है. वर्ष 2026 में यह खास दिन 5 अप्रैल को पड़ रहा है, जिसे विकट संकष्टी चतुर्थी के रूप में जाना जाता है. यह दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है. मान्यता है कि सच्चे मन से इस व्रत को रखने से जीवन के बड़े से बड़े कष्ट भी दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत का महत्व बहुत विस्तार से बताया गया है.
गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में इसके बारे में कई कथाएं मिलती हैं. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान शिव और मां पार्वती के बीच श्रेष्ठता को लेकर चर्चा हुई, तब गणेश जी ने अपनी बुद्धिमानी से अपने माता-पिता की परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि उनके लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं. इसी कारण उन्हें प्रथम पूज्य होने का सम्मान मिला. एक अन्य मान्यता के अनुसार, कृष्ण ने युधिष्ठिर को कठिन परिस्थितियों से निकलने के लिए इस व्रत को करने की सलाह दी थी. तब से यह व्रत संकटों से मुक्ति पाने का एक प्रभावी उपाय माना जाता है.
व्रत की विधि और पूजा का तरीका
संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने वाले भक्त सुबह से लेकर चंद्रमा के निकलने तक उपवास रखते हैं. इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से की जाती है. पूजा में दूर्वा, लाल फूल और मोदक चढ़ाना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये सभी चीजें गणेश जी को प्रिय हैं. शाम के समय चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उसे अर्घ्य दिया जाता है और तभी व्रत खोला जाता है. इस दौरान शांति से बैठकर गणेश मंत्रों का जाप या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है. इसके साथ ही दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
जीवन में सुख और संतुलन का संदेश
यह व्रत केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने का संदेश भी देता है. संकष्टी चतुर्थी हमें सिखाती है कि कठिन समय में धैर्य बनाए रखना और समझदारी से निर्णय लेना कितना जरूरी है. परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखना भी इस पर्व की एक खास सीख है. जिस तरह गणेश जी ने अपने माता-पिता का सम्मान किया, उसी तरह हमें भी अपने परिवार के प्रति समर्पण रखना चाहिए.
परिवार और समाज में सकारात्मक प्रभाव
इस व्रत का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि पूरे परिवार की खुशहाली और तरक्की भी है. माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से घर में चल रही समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं. आपसी रिश्तों में मिठास आती है और परिवार के सदस्य एक-दूसरे के करीब आते हैं.


