कोलकाताः अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर और विश्व कप विजेता कप्तान लियोनेल मेस्सी के भारत दौरे के पहले चरण के दौरान शनिवार को कोलकाता का माहौल अलग ही था. मेसी के फैन्स में गजब का उत्साह और अव्यवस्था दोनों से भरा नजर आया. फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह दिन ऐतिहासिक था, लेकिन खराब प्रबंधन और सीमित पहुंच के कारण यह उत्सव कई दर्शकों के लिए निराशा में बदल गया.
लियोनेल मेस्सी शनिवार तड़के करीब 2:26 बजे कोलकाता पहुंचे. शहर पहुंचते ही उनके स्वागत को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया. सुबह उन्होंने लेक टाउन इलाके में अपनी 70 फीट ऊंची प्रतिमा का वर्चुअल अनावरण किया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा रही. इसके बाद मेस्सी दिन के मुख्य कार्यक्रम के लिए सॉल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) पहुंचे.
करीब 11:30 बजे जब मेस्सी स्टेडियम पहुंचे, तब वहां हजारों दर्शक पहले से मौजूद थे. लोग अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक पाने को बेताब थे. हालांकि, जैसे ही मेस्सी मैदान में पहुंचे, वे राजनीतिक नेताओं, पूर्व फुटबॉलरों, कोचों और आयोजन समिति के सदस्यों से घिर गए. इसके चलते स्टैंड में बैठे दर्शकों को उन्हें साफ तौर पर देखने का मौका बेहद कम मिला.
अपने छोटे से स्टेडियम प्रवास के दौरान मेस्सी लगातार मुस्कुराते नजर आए और तालियों व नारों के बीच दर्शकों का अभिवादन किया. उन्होंने मोहन बागान ‘मेस्सी’ ऑल स्टार्स और डायमंड हार्बर ‘मेस्सी’ ऑल स्टार्स के बीच खेले जा रहे प्रदर्शनी मैच में शामिल पूर्व भारतीय फुटबॉलरों से संक्षिप्त मुलाकात भी की. हालांकि यह पल भी कई दर्शकों के लिए दूर से ही देखने तक सीमित रहा.
आयोजकों और सुरक्षा कर्मियों ने मेस्सी के सम्मान में चक्कर लगाने के दौरान रास्ता साफ करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ को इस तरह नियंत्रित नहीं किया जा सका कि हर स्टैंड से साफ दृश्य मिल सके. इसी अफरा-तफरी के कारण कई पहले से तय कार्यक्रम पूरे नहीं हो सके.
इस अव्यवस्था के बीच बंगाल की संतोष ट्रॉफी विजेता टीम का अभिनंदन समारोह और बच्चों के लिए प्रस्तावित मेस्सी के साथ मास्टर क्लास जैसे खास कार्यक्रम रद्द कर दिए गए. इससे दर्शकों की नाराजगी और बढ़ गई.
कड़ी सुरक्षा के बीच जैसे ही मेस्सी स्टेडियम से बाहर निकले, दर्शकों का सब्र टूट गया. गुस्साई भीड़ ने बोतलें, पोस्टर और कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं. स्टेडियम में जोरदार हूटिंग गूंजने लगी. कई लोगों का कहना था कि उन्होंने महंगे टिकट खरीदे थे, लेकिन न तो मेस्सी को करीब से देख पाए और न ही उनसे कोई संवाद हो सका.
घटना के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. राजभवन के सूत्रों के अनुसार, कई फुटबॉल प्रेमियों ने राज्यपाल से शिकायत की कि अत्यधिक टिकट कीमतों के बावजूद उन्हें अपने पसंदीदा खिलाड़ी की झलक तक नहीं मिल पाई.
राज्यपाल ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस आयोजन में आम जनता की भावनाओं की अनदेखी कर सिर्फ व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता दी गई. उन्होंने मेस्सी की यात्रा में राज्य सरकार की भूमिका और आयोजन की पारदर्शिता पर भी स्पष्टीकरण मांगा है.
First Updated : Saturday, 13 December 2025