भारतीय हॉकी का शानदार सफर वर्ष 1925 में शुरू हुआ था, जब ग्वालियर में इंडियन हॉकी फेडरेशन (IHF) की स्थापना हुई. अगले ही साल भारत ने पहली बार न्यूजीलैंड का दौरा किया, जहां मेजर ध्यानचंद ने अपने अद्भुत खेल से सभी का ध्यान खींचा.
पिछले 100 वर्षों में भारत ने ओलंपिक में 13 पदक (8 स्वर्ण, 1 रजत और 4 कांस्य) जीतकर विश्व हॉकी में अपनी बादशाहत कायम रखी. आइए जानते हैं भारत की उन 10 ऐतिहासिक जीतों के बारे में, जिन्होंने इतिहास रचा.
हॉकी की अंतरराष्ट्रीय यात्रा के तीन साल बाद ही भारत ने एम्स्टर्डम ओलंपिक में नीदरलैंड को 3-0 से हराकर पहला स्वर्ण जीता. पूरे टूर्नामेंट में भारत के खिलाफ एक भी गोल नहीं हुआ.
2. लॉस एंजिल्स ओलंपिक (1932) – रिकॉर्ड जीत
चार साल बाद भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराकर लगातार दूसरा गोल्ड जीता. ध्यानचंद ने 8 और रूप सिंह ने 10 गोल दागे. यह जीत आज भी हॉकी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में गिनी जाती है.
मेजर ध्यानचंद की कप्तानी में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराकर तीसरा लगातार स्वर्ण जीता और दुनिया को दिखा दिया कि हॉकी का असली बादशाह भारत है.
आज़ादी के एक साल बाद भारत ने ब्रिटेन को 4-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता. यह जीत भारतीय खेल इतिहास का गर्व का क्षण बनी.
भारत ने नीदरलैंड को 6-1 से हराया. बलबीर सिंह सीनियर ने अकेले 5 गोल दागे, जो आज भी एक रिकॉर्ड है.
पहली बार भारत और पाकिस्तान फाइनल में आमने-सामने आए, जहां भारत ने 1-0 से जीत दर्ज कर लगातार छठा स्वर्ण जीता.
1960 के ओलंपिक में मिली हार का बदला भारत ने टोक्यो में लिया, फाइनल में पाकिस्तान को 1-0 से हराकर सातवां गोल्ड जीता.
कुआलालंपुर में भारत ने पाकिस्तान को हराकर पहली और अब तक की एकमात्र विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की.
14 साल के अंतराल के बाद भारत ने स्पेन को 4-3 से हराकर अपना आठवां ओलंपिक स्वर्ण जीता.
10. टोक्यो ओलंपिक (2021) – 41 साल बाद कांस्य पदक
लंबे इंतजार के बाद भारत ने जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य जीता. इसके बाद पेरिस 2024 में भी टीम इंडिया ने ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया. First Updated : Friday, 07 November 2025