MS Dhoni Birthday: रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से क्रिकेट के शिखर तक, आज भी अनसुने हैं कैप्टन कूल के ये 5 किस्से

आज, यानी 7 जुलाई को पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. झारखंड के रांची की गलियों से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने वाले धोनी की कहानी केवल क्रिकेट रिकॉर्ड्स की नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और खुद पर विश्वास की एक जीवित मिसाल है.

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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी शांत नेतृत्व, करिश्माई कप्तानी और दबाव में मैच पलटने वाले खिलाड़ी का जिक्र होगा, तो महेंद्र सिंह धोनी का नाम सबसे पहले जेहन में आएगा. आज, यानी 7 जुलाई को पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. झारखंड के रांची की गलियों से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने वाले धोनी की कहानी केवल क्रिकेट रिकॉर्ड्स की नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और खुद पर विश्वास की एक जीवित मिसाल है. स्कूल के दिनों में फुटबॉल के गोलकीपर रहे माही को उनके कोच ने विकेटकीपिंग की सलाह दी थी, जिसने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट की तकदीर बदल दी.

रेलवे की नौकरी से इंटरनेशनल डेब्यू तक का संघर्ष

क्रिकेट जगत में कदम रखने से पहले धोनी ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में भारतीय रेलवे में ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) के रूप में काम किया. उन्होंने साल 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया. हालांकि शुरुआती कुछ मैचों में उनका बल्ला शांत रहा, लेकिन 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई 148 रनों की पारी और उसके बाद श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रनों के प्रचंड धमाके ने उन्हें रातों-रात इंटरनेशनल क्रिकेट का नया सुपरस्टार बना दिया. उनके लंबे बालों का स्टाइल और गगनचुंबी छक्के लगाने की कला प्रशंसकों के दिलों में उतर गई.

इतिहास के इकलौते कप्तान जिसने जीते तीनों ICC खिताब

साल 2007 में सीनियर खिलाड़ियों के बिना जब युवा धोनी को टी20 विश्व कप की कमान सौंपी गई, तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि भारत चैंपियन बनेगा. लेकिन अपनी शांत सोच और अनूठी रणनीति से धोनी ने टीम को पहला टी20 विश्व कप जिताकर 'कैप्टन कूल' की उपाधि हासिल की. इसके बाद आया साल 2011, जब मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका के खिलाफ उनके नाबाद 91 रन और ऐतिहासिक विजयी छक्के ने भारत का 28 साल पुराना वनडे विश्व कप जीतने का सपना पूरा किया. फिर 2013 में उन्होंने भारत को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी दिलाई. धोनी दुनिया के एकमात्र ऐसे कप्तान हैं जिनके पास ये तीनों आईसीसी चमचमाती ट्रॉफियां हैं.

'थाला' की बेमिसाल विरासत और सम्मान

इंटरनेशनल क्रिकेट में 17,000 से अधिक रन बनाने और विकेट के पीछे 800 से ज्यादा शिकार करने वाले धोनी ने भारत को पहली बार टेस्ट में नंबर-1 टीम बनाया. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को 5 बार चैंपियन बनाने वाले धोनी को चेन्नई के फैंस सम्मान से 'थाला' कहते हैं. क्रिकेट में उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और सर्वोच्च खेल सम्मान 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न' से नवाज चुकी है. हालांकि उन्होंने 15 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, लेकिन आज भी जब वे मैदान पर उतरते हैं, तो पूरा स्टेडियम सिर्फ उनके नाम से गूंज उठता है. First Updated : Tuesday, 07 July 2026

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