नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत 2008 में हुई थी। मकसद साफ था कि देश के युवा क्रिकेटरों को एक बड़ा मंच मिले। पिछले 19 सालों से IPL इस काम को बखूबी कर रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि IPL की चमचमाती ट्रॉफी पर संस्कृत में एक खास श्लोक लिखा हुआ है? IPL 2026 फाइनल से पहले जानते हैं इस श्लोक का मतलब और ट्रॉफी का इतिहास।
शुरुआती तीन साल यानी 2008, 2009 और 2010 में IPL की ट्रॉफी का डिजाइन बिल्कुल अलग था। उस ट्रॉफी का आकार भारत के नक्शे जैसा था। 2011 में ट्रॉफी को नया रूप दिया गया। तभी से जो ट्रॉफी इस्तेमाल हो रही है वो आज तक वैसी ही है। पिछले 15 साल में इसके डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया।
2011 से IPL की ट्रॉफी पर संस्कृत में लिखा हुआ है, यत्र प्रतिभा अवसरा प्राप्नोतिहि। हिंदी में इसका मतलब है जहां प्रतिभा और अवसर का मिलन होता है। यह लाइन IPL की सोच को पूरी तरह दर्शाती है। लीग वाकई में युवा खिलाड़ियों को दुनिया का सबसे बड़ा मंच देती है। यहां देश विदेश के टैलेंट को अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलता है।
संस्कृत का यह वाक्य सिर्फ ट्रॉफी पर लिखा हुआ एक श्लोक नहीं है। ये IPL की आधिकारिक टैगलाइन भी है। दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक संस्कृत में लिखी यह लाइन टूर्नामेंट के मूल विचार को बताती है। ट्रॉफी के निचले हिस्से पर हर साल जीतने वाली टीम का नाम भी उकेरा जाता है।
फाइनल जीतने के बाद टीम को मंच पर जो मुख्य ट्रॉफी दी जाती है वो सिर्फ कुछ देर के लिए होती है। असली ट्रॉफी BCCI अपने पास रखती है और हर साल उसी का इस्तेमाल होता है। विजेता फ्रेंचाइजी को अपने पास रखने के लिए बिल्कुल वैसी ही एक रेप्लिका दी जाती है। उस रेप्लिका पर भी यही संस्कृत श्लोक लिखा होता है।
गौरतलब है कि BCCI ने IPL को ग्लोबल पहचान देने के लिए ट्रॉफी का डिजाइन बदला था। शुरुआत की तीन साल वाली ट्रॉफी थोड़ी लोकल लगती थी। 2011 में आई नई ट्रॉफी कप के शेप में थी। इसका लुक इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का था और इसमें वो दमखम दिखा जो एक ग्लोबल लीग की ट्रॉफी में होना चाहिए। First Updated : Sunday, 31 May 2026