बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने रिकॉर्ड जीत दर्ज करते हुए सत्ता में जबरदस्त वापसी की है. शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम परिणामों तक, एनडीए ने विपक्ष को मात देते हुए भारी बहुमत हासिल किया. इस जीत के पीछे कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक कारक रहे, जिन्होंने गठबंधन की पकड़ को और मजबूत किया.
नीतीश कुमार के नेतृत्व, केंद्र–राज्य की डबल इंजन सरकार की योजनाओं, और महिला एवं पिछड़े वर्गों के मजबूत समर्थन ने इस चुनावी परिणाम को निर्णायक बनाया. वहीं भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार अमित शाह की रणनीतियों ने चुनावी माहौल को एनडीए के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभाई.
नीतीश कुमार की सुरक्षा के गारंटर वाली छवि चुनाव में एक निर्णायक फैक्टर साबित हुई. लंबे समय से ‘सुशासन बाबू’ की पहचान रखने वाले नीतीश ने कानून-व्यवस्था और स्थिर शासन के भरोसे पर जनता का विश्वास फिर जीता.
महिला वोटरों ने एक बार फिर नीतीश कुमार और एनडीए के पक्ष में एकजुट होकर मतदान किया. शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी योजनाओं ने इस वर्ग को एनडीए के साथ मजबूती से जोड़े रखा. गैर-यादव ओबीसी, ईबीसी और दलित मतदाताओं का भरोसा कायम
एनडीए ने एक बार फिर गैर-यादव पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों का भरोसा बरकरार रखा.
इन समुदायों का संगठित वोट बैंक चुनाव में निर्णायक साबित हुआ और गठबंधन को मजबूत बढ़त दिलाई.
बीजेपी के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले अमित शाह ने चुनाव से पहले बागी उम्मीदवारों को मैदान से बाहर रखने की रणनीति अपनाई. इससे वोटों के बिखराव पर लगाम लगी और एनडीए की सीटों में सीधा फायदा देखने को मिला.
जनता दल ने अपनी बड़ी चुनावी कामयाबी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने लिखा कि नीतीश कुमार ने जंगल राज, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और विपक्ष के घमंड को बिहार की राजनीति से बाहर धकेल दिया है. First Updated : Friday, 14 November 2025