मारते-मारते हाथ पकड़ा, बंद मुट्ठी खोलने का दिया चैलेंज...MP में 11वीं की छात्रा ने की खुदकुशी, मेल टीचर पर लगाए टॉचर के आरोप

मध्य प्रदेश के रीवा में कक्षा 11 की एक छात्रा ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली और नोट में अपने शिक्षक पर प्रताड़ना के आरोप लगाए. परिवार ने स्कूल में दबाव की आशंका जताई है, जबकि पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

रीवा : मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक निजी स्कूल की कक्षा 11 की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने इलाके में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ा दी है. 17 वर्ष की इस छात्रा को 16 नवंबर को घर में मृत पाया गया. पुलिस के अनुसार, उसकी कॉपी में एक हस्तलिखित नोट मिला है, जिसमें उसने अपने शिक्षक पर अनुचित बर्ताव और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं.छात्रा ने लिखा कि शिक्षक ने उसे कई बार दंड के नाम पर शारीरिक रूप से परेशान किया और हाथ पकड़कर असहज स्थिति पैदा की.

परिवार ने कि कॉल डिटेल्स जांच की मांग 
वहीं इस पूरे मामले पर परिवार का कहना है कि घर पर वह बिल्कुल सामान्य रहती थी और स्कूल में किसी द्वारा उसे लगातार मानसिक दबाव दिया जा रहा था. परिवार ने स्कूल से जुड़े मामलों और कॉल डिटेल्स की जांच की मांग की है. पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके.

देश में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं

दरअसल, रीवा की यह घटना नवंबर माह में सामने आए कई ऐसे मामलों में से एक है, जिसने बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इसी सप्ताह दिल्ली में कक्षा 10 के एक छात्र ने कथित मानसिक उत्पीड़न का जिक्र करते हुए जीवन समाप्त कर लिया, जबकि परिवार ने बताया कि वह अभिनय के सपने देखता था. महाराष्ट्र के ठाणे में भी 19 वर्षीय छात्र की मौत दर्ज की गई, जिसकी पृष्ठभूमि में ट्रेन में हुए विवाद और स्थानीय लोगों द्वारा कथित दुर्व्यवहार की बात सामने आई है.

जयपुर में चौथी की छात्रा की मौत 
बता दें कि इसी महीने जयपुर के एक निजी स्कूल में चौथी कक्षा की एक बच्ची की भी मौत की घटना उजागर हुई, जिसकी जांच में सीबीएसई ने पाया कि वह लंबे समय से साथियों द्वारा लगातार बुलिंग का शिकार थी और स्कूल प्रशासन इसे रोकने में असफल रहा. ऐसे मामले यह दर्शाते हैं कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, स्कूलों की जिम्मेदारी, और सुरक्षित सीखने के माहौल को लेकर गंभीर खामियाँ मौजूद हैं.

माता-पिता और स्कूलों के लिए चेतावनी
लगातार सामने आ रही ये घटनाएँ इस बात की ओर संकेत देती हैं कि छात्रों पर पढ़ाई, सामाजिक दबाव, और स्कूल-परिसर में होने वाले उत्पीड़न का असर कितना गहरा हो सकता है. यह समय है जब स्कूलों को संवेदनशील शिकायत तंत्र, प्रभावी काउंसलिंग और छात्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. साथ ही, परिवारों को भी बच्चों में होने वाले भावनात्मक बदलावों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि समय रहते उचित सहायता मिल सके.

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