दादरी, नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र को मिलाकर विकसित किए जा रहे दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र (डीएनजीआइआर) के तहत बनने वाले ‘नया नोएडा’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर का औद्योगिक शहर बनाने की योजना तैयार की गई है. इस शहर को अबू धाबी के औद्योगिक जोन की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है.
योजना के मुताबिक यहां लगभग तीन हजार औद्योगिक इकाइयों को स्थापित किया जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. नया नोएडा को करीब छह लाख की आबादी को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है. इसमें लगभग 3.5 लाख लोग प्रवासी यानी माइग्रेंट होंगे, जो औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में काम करने के लिए यहां बसेंगे. शहर में पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए 300 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी.
इस पानी की आपूर्ति गंगाजल और भूमिगत जल को मिलाकर की जाएगी. इसके लिए नलकूप, जलाशय और अन्य जल संरचनाओं की संख्या को लेकर भी विस्तृत योजना बनाई जा रही है. डीएनजीआइआर के लिए 2041 का मास्टर प्लान तैयार किया जा चुका है. इस मास्टर प्लान में बिजली, पानी, सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचे को विस्तार से शामिल किया गया है. शहर के विकास में पर्यावरण संरक्षण को भी ध्यान में रखा गया है. गिरते भूजल स्तर को सुधारने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए लगभग 58.96 हेक्टेयर क्षेत्र में झील और 91.75 हेक्टेयर में नहर (कैनाल) विकसित की जाएगी.
पानी के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट योजना बनाई गई है. कुल 300 एमएलडी पानी में से करीब 212 एमएलडी पानी औद्योगिक इकाइयों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि घरेलू उपयोग के लिए लगभग 85 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जाएगा. औद्योगिक और घरेलू गतिविधियों से निकलने वाले दूषित पानी को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाएंगे, ताकि पानी को दोबारा उपयोग में लाया जा सके और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.
नया नोएडा को बसाने के लिए बुलंदशहर और दादरी क्षेत्र के करीब 80 गांवों की जमीन को शामिल किया जाएगा. जमीन का अधिग्रहण लैंड पूलिंग नीति के जरिए किया जाएगा. पूरे प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल करीब 21 हजार हेक्टेयर होगा, जिसमें से लगभग 8811 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक गतिविधियों के लिए निर्धारित की गई है.
लोगों के रहने के लिए चार श्रेणियों- ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी के मकान बनाए जाएंगे. इन मकानों को टाइप-1, टाइप-2 और टाइप-3 मॉडल में विकसित किया जाएगा, ताकि अलग-अलग आय वर्ग के लोग यहां रह सकें.
मास्टर प्लान के अनुसार करीब 2477 हेक्टेयर क्षेत्र आवासीय उपयोग के लिए होगा, जबकि 905.97 हेक्टेयर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्धारित है. इसके अलावा संस्थागत, हरित क्षेत्र, पार्क, जल निकाय और परिवहन सुविधाओं के लिए भी बड़ी मात्रा में जमीन आरक्षित की गई है, जिससे नया नोएडा एक सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित हो सके. First Updated : Monday, 09 March 2026