फिर क्यों भड़क उठा JNU? विरोध पर क्यों उतारू हुए छात्र? जानिए पूरी कहानी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के शिक्षा मंत्रालय तक प्रस्तावित मार्च को रोकने के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हो गया, जिसमें 50 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया गया. छात्रों ने नए UGC नियमों और प्रशासनिक फैसलों का विरोध किया, जबकि पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति मार्च निकालने पर कार्रवाई की गई.

देश की राजधानी में स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र प्रदर्शन को लेकर चर्चा में आ गया है. विश्वविद्यालय के छात्र संघ JNUSU ने शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर विरोध जताने के लिए कैंपस से Ministry of Education तक लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था. इस मार्च का मुख्य उद्देश्य रोहित एक्ट लागू करने और UGC के नए नियमों के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराना था. हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए और सुरक्षा बलों तथा छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बन गई.
50 से अधिक छात्र हिरासत में
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए Delhi Police के अलावा RAF और CRPF के जवानों को भी तैनात किया गया था. पुलिस ने मार्च को कैंपस के बाहर जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी. इसके बावजूद जब सैकड़ों छात्र आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने हस्तक्षेप किया और करीब 50 से अधिक छात्रों को हिरासत में ले लिया. इस कार्रवाई के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर कुछ छात्र सुरक्षाकर्मियों से बहस करते और आक्रोश जताते नजर आ रहे हैं.
कुछ वीडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ छात्र पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए उकसा रहे थे. वहीं, पुलिस का कहना है कि वह वीडियो फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की. दूसरी ओर, छात्रसंघ और प्रदर्शन में शामिल छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च को रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्र घायल हो गए.
क्यों किया छात्रों ने विरोध?
छात्रों के अनुसार, उनका विरोध विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों, बजट में कटौती, छात्रसंघ पदाधिकारियों पर की गई कार्रवाई और नए शैक्षणिक नियमों के खिलाफ था. प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं और कुछ संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों को भी कई घंटों तक थाने में रखा गया. पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति के कैंपस से बाहर मार्च निकालना नियमों का उल्लंघन था, इसलिए कार्रवाई की गई.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है. एक तरफ प्रशासन और पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहे हैं, वहीं छात्र अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आवाज उठाने पर अड़े हुए हैं. फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.


