भारत में डिजिटल डेटा प्राइवेसी और प्रतिस्पर्धा कानूनों को लेकर मेटा प्लेटफॉर्म्स और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच चल रही कानूनी जंग अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. 13 मई को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ये तय करेगा कि मेटा की अपील पर सुनवाई भारत में नए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियम लागू होने से पहले होगी या बाद में. इस फैसले का प्रभाव पूरे देश की डिजिटल डेटा सुरक्षा नीतियों पर पड़ सकता है.
मेटा लंबे समय से CCI के उस आदेश को चुनौती दे रही है, जिसमें WhatsApp को अपने यूजर डेटा को Facebook और Instagram के साथ साझा करने से रोक दिया गया था. इसके अलावा, CCI ने Meta पर ₹213 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया था, जिसे कंपनी ने अनुचित करार दिया. अब सवाल ये है कि क्या नए डेटा प्रोटेक्शन नियम लागू होने से पहले ये मामला निपटेगा या मेटा को राहत मिलेगी?
NCLAT की न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी. मुख्य मुद्दा ये है कि क्या नए डिजिटल डेटा संरक्षण कानून CCI के अधिकार क्षेत्र के साथ ओवरलैप करते हैं? यदि ट्रिब्यूनल को ऐसा लगता है, तो वह सुनवाई को नए कानून लागू होने तक टाल सकता है, जिससे Meta को बड़ी राहत मिलेगी.
Meta की कानूनी टीम का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि एक बार 2025 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियम लागू हो जाए, तो CCI की भूमिका ही खत्म हो जाएगी. उनका तर्क है कि नए कानूनों के तहत डेटा गोपनीयता और संग्रहण से जुड़े मामलों का निपटारा होगा, इसलिए CCI को इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है.
दूसरी ओर, CCI का कहना है कि मामले की सुनवाई में देरी नहीं होनी चाहिए. CCI ने 18 नवंबर 2024 को दिए गए अपने आदेश में साफ कहा था कि WhatsApp की डेटा-शेयरिंग नीति प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करती है और यूजर्स को उनकी सहमति के बिना डेटा साझा करने के लिए मजबूर करती है. CCI का मानना है कि WhatsApp की 2021 की गोपनीयता नीति उपभोक्ता हितों के खिलाफ थी और इसे रोकना जरूरी है.
अब 13 मई को NCLAT ये तय करेगा कि मामला तुरंत सुना जाएगा या नए कानूनों के लागू होने तक इसे स्थगित किया जाएगा. अगर सुनवाई टलती है, तो ये Meta के लिए बड़ी जीत होगी, क्योंकि नए कानून कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. लेकिन अगर NCLAT CCI के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो Meta को कानूनी लड़ाई में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. First Updated : Tuesday, 18 March 2025